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PCOS Is Now PMOS: पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को लंबे समय से महिलाओं में होने वाली एक आम हार्मोनल समस्या माना जाता रहा है। लेकिन हाल ही में विशेषज्ञों ने इस बीमारी को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है।
अब PCOS को केवल ओवरी की समस्या न मानकर पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल सिस्टम से जुड़ी स्थिति के रूप में देखा जा रहा है, जिसे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) नाम दिया गया है।
नए नाम के जरिए डॉक्टर इस बीमारी को ज्यादा सही और व्यापक तरीके से समझाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि सही समय पर पहचान और इलाज संभव हो सके।

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PCOS का नाम क्यों बदला गया?
– फोटो : Freepik.com
PCOS को क्यों कहा जा रहा है PMOS
डॉक्टरों के अनुसार PCOS शब्द में “Cyst” शामिल होने के कारण लोगों में यह धारणा बन जाती है कि हर मरीज के अंडाशय में सिस्ट (गांठें) जरूर होती हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। कई महिलाओं में PCOS के लक्षण तो दिखाई देते हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड में सिस्ट नहीं मिलते। इसलिए विशेषज्ञ इसे केवल ओवरी की बीमारी न मानकर एक व्यापक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के रूप में देख रहे हैं। इसी वजह से इसका नाम “PMOS” यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम रखा गया है, ताकि बीमारी को ज्यादा सही तरीके से समझाया जा सके।

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PCOS का नाम क्यों बदला गया?
– फोटो : Freepik.com
यह सिर्फ ओवरी की बीमारी नहीं
PMOS को केवल रिप्रोडक्टिव ऑर्गन की समस्या नहीं माना जाता, बल्कि यह पूरे शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी स्थिति है। इसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे शरीर में शुगर प्रोसेसिंग प्रभावित होती है। इसके कारण वजन बढ़ना, थकान और हार्मोन असंतुलन जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। यह स्थिति धीरे-धीरे शरीर के कई सिस्टम को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसे सिर्फ “ओवरी की बीमारी” कहना सही नहीं माना जाता।

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– फोटो : Freepik.com
पीएमओएस के मुख्य लक्षण क्या हैं
PMOS में लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। सबसे आम लक्षणों में अनियमित पीरियड्स, वजन का तेजी से बढ़ना, चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल, मुंहासे और बालों का झड़ना शामिल हैं। कुछ महिलाओं में मूड स्विंग्स और थकान भी देखी जाती है। कई बार लक्षण हल्के होते हैं, जिससे बीमारी की पहचान देर से होती है। इसलिए शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर जांच करानी जरूरी होती है।

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– फोटो : Freepik.com
क्यों जरूरी है नया नाम ?
विशेषज्ञों का मानना है कि PMOS जैसा नया नाम बीमारी को अधिक स्पष्ट और वैज्ञानिक तरीके से समझाने में मदद करेगा। इससे मरीजों में गलतफहमी कम होगी और डॉक्टर भी इसे मेटाबॉलिक समस्या के रूप में बेहतर तरीके से समझा सकेंगे। सही नामकरण से बीमारी की सही पहचान, समय पर इलाज और बेहतर मैनेजमेंट संभव हो सकता है। इससे महिलाओं की सेहत को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी और इलाज की दिशा अधिक प्रभावी हो सकती है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
