अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने यूरोपीय संघ पर अमेरिकी टेक कंपनियों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ लगातार अमेरिका की बड़ी कंपनियों को निशाना बना रहा है। ट्रंप के मुताबिक, एप्पल, मेटा, अमेजन और अब गूगल पर लगाए गए भारी जुर्माने इसका उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब इस मामले को चुपचाप नहीं देखेगा और इसके खिलाफ कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने कहा कि यूरोपीय संघ ने पहले बिना किसी वजह के एप्पल पर 15 अरब डॉलर, मेटा पर 3 अरब डॉलर, अमेजन पर 2.5 अरब डॉलर और कई अन्य अमेरिकी कंपनियों पर जुर्माना लगाया। उन्होंने दावा किया कि अब गूगल पर भी एक अरब डॉलर का नया जुर्माना लगाया गया है, जिससे गूगल पर कुल जुर्माने की राशि 18 अरब डॉलर से अधिक हो गई है। ट्रंप ने कहा कि यह गैरकानूनी और अत्यधिक भेदभावपूर्ण तरीका है।
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ट्रंप ने यूरोपीय संघ पर क्या आरोप लगाए?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के पहले वर्ष में ऊंचे स्तर पर हुई थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के दौरान यह स्थिति जारी नहीं रहने दी जाएगी। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका यूरोप के लिए कोई “पिगी बैंक” नहीं है और वह अमेरिकी कंपनियों तथा अमेरिकी करदाताओं के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं करेगा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिकी कंपनियों को “लूटने” की कथित प्रथा की 301 जांच तुरंत शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि यह संदेश आधिकारिक चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, अमेरिकी कंपनियों और करदाताओं को नुकसान पहुंचाने वाली इस नीति की पूरी जांच की जाएगी।
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यूरोपीय संघ के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की बात कही?
ट्रंप ने कहा कि यूरोपीय संघ को इस कथित गैरकानूनी और अनैतिक व्यवहार की बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि लगाए गए दंड पूरी तरह पलट दिए जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ पर जल्द से जल्द बड़ा टैरिफ लगाने की भी उम्मीद है। ट्रंप ने अपने बयान के अंत में कहा कि आगे की कार्रवाई के लिए इंतजार कीजिए।
चीन के राष्ट्रपति पर क्या बोले ट्रंप?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में हालिया मुलाकात के दौरान उन्हें भरोसा दिया कि चीन किसी भी परिस्थिति में इस्लामी गणराज्य ईरान को हथियार नहीं देगा और न ही बेचेगा। ट्रंप ने कहा कि यह बात चीनी कंपनियों पर भी लागू होती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उन्हें आश्वासन दिया है कि रूस ईरान को हथियार नहीं बेचेगा। ट्रंप ने कहा कि चीन और रूस जैसे बड़े देशों का ईरान को हथियार न देना उनके अपने हित में भी है।
ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध का क्यों जिक्र किया?
ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुतिन के साथ उनका संबंध बना हुआ है, जैसा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ भी है। ट्रंप ने कहा कि वह यूक्रेन को सीधे हथियार नहीं बेचते, बल्कि नाटो देशों को हथियार बेचते हैं। उनके अनुसार, नाटो देश इन हथियारों की पूरी कीमत चुकाते हैं और बाद में उनका वितरण कैसे होता है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। ट्रंप ने कहा कि उनकी राय में चीन और रूस ईरान को हथियार देने में शामिल नहीं हैं और अगर ऐसा हुआ तो यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा।
ट्रंप ने कनाडा पर क्या निशाना साधा?
एक अन्य बयान में ट्रंप ने कनाडा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कनाडा ने गॉर्डी होवे ब्रिज के उद्घाटन समारोह में अमेरिका को आमंत्रित नहीं किया, लेकिन इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि कनाडा अमेरिका को पर्याप्त टैरिफ दे रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि पिछली सरकार के दौरान पुल से जुड़ा समझौता खराब तरीके से किया गया था, जिसे उनकी सरकार ने बदल दिया। उन्होंने कहा कि नए समझौते के तहत अब अमेरिका को इस परियोजना के मुनाफे का 50 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा।


