अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को अब भी अमेरिकी जनता का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा है कि युद्ध लंबा खिंचने और अमेरिकी सैनिकों की बढ़ती मौतों के कारण देश के भीतर विरोध बढ़ रहा है। ईरान के साथ संघर्ष अब पांचवें महीने में प्रवेश कर चुका है।
क्या अमेरिकी जनता वास्तव में युद्ध के खिलाफ नहीं है?
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी जनता की सबसे बड़ी चिंता युद्ध नहीं, बल्कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें हैं। उन्होंने दावा किया कि इस युद्ध में ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ट्रंप ने आगे कहा, ‘उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। वे पूरी तरह तबाह हो रहे हैं।’ जब उनसे पूछा गया कि अमेरिकी सैनिकों की बढ़ती मौतों के बीच क्या जनता अब भी अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई का समर्थन करती है, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘अमेरिकी इस युद्ध के खिलाफ नहीं हैं।’
‘ऊंची पेट्रोल कीमतें नहीं चाहते अमेरिकी’
उन्होंने आगे कहा, ‘अमेरिकी ऊंची पेट्रोल कीमतें नहीं चाहते, लेकिन वे युद्ध के विरोध में नहीं हैं। यह बात हाल ही में आए एक नए सर्वे में भी साफ हो गई है।’ हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि वह किस सर्वेक्षण का जिक्र कर रहे थे।
ईरान को ट्रंप ने क्या नई चेतावनी दी?
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उन्होंने हाल ही में तेहरान को सैन्य कार्रवाई और तेज करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी भी वाणिज्यिक जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका हर हमले के जवाब में ईरान के एक पुल या बिजली संयंत्र को निशाना बनाएगा। सोशल मीडिया पर ट्रंप ने लिखा कि यदि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला करता है, तो अमेरिका ईरान के एक पुल या बिजली संयंत्र को बमबारी कर पूरी तरह नष्ट कर देगा।’
क्या अमेरिका अभी युद्ध खत्म करने के मूड में नहीं है?
ट्रंप ने मंगलवार को स्पष्ट संकेत दिए कि अमेरिका फिलहाल अपना सैन्य अभियान समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि हम अभी बिल्कुल खत्म नहीं हुए हैं। हम इस समय वहां से नहीं जा रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव क्यों बढ़ा?
होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लगातार बढ़ते सैन्य तनाव की वजह ईरान द्वारा वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को रोकने के लिए फिर से समुद्री नाकेबंदी शुरू करना बताया जा रहा है। इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ा है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसके चलते अमेरिका में भी ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं और व्हाइट हाउस पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
लारक द्वीप पर क्या हुआ?
ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, बुधवार को अमेरिका की एक मिसाइल होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित लारक द्वीप पर गिरी। तेहरान प्रशासन ने बताया कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
क्या सर्वेक्षण ट्रंप के दावे का समर्थन करते हैं?
ट्रंप ने भले ही दावा किया हो कि अमेरिकी जनता युद्ध के समर्थन में है, लेकिन हाल के कई जनमत सर्वेक्षण इसके विपरीत तस्वीर पेश करते हैं। खास बात यह है कि उनके अपने समर्थक वर्ग के एक हिस्से में भी लंबे समय तक चलने वाले इस युद्ध को लेकर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। ट्रंप ने जिस सर्वे का हवाला दिया, उसका नाम या विवरण साझा नहीं किया।
सर्वेक्षणों में क्या सामने आया?
कई सर्वेक्षणों के अनुसार, बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के विरोध में हैं। इकोनॉमिस्ट/यूगव के एक सर्वे के मुताबिक 55 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमेरिका को ईरान पर हमले बंद कर देने चाहिए, जबकि केवल 27 प्रतिशत लोग सैन्य कार्रवाई जारी रखने के पक्ष में हैं। वहीं वॉशिंगटन पोस्ट-इप्सोस के सर्वे में 68 प्रतिशत अमेरिकियों ने कहा कि यह संघर्ष लड़ने लायक नहीं है। इसके अलावा एनपीआर और मैरिस्ट कॉलेज के एक अन्य सर्वे में 56 प्रतिशत लोगों ने सैन्य कार्रवाई का विरोध किया।
युद्ध पर अमेरिका का कितना खर्च हो चुका है?
यह सैन्य अभियान अमेरिका पर भारी आर्थिक बोझ भी डाल रहा है। अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने इस सप्ताह बताया कि अभियान पर अब तक 37.5 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। उन्होंने प्रशासन द्वारा अतिरिक्त सैन्य बजट के लिए मांगी गई आपातकालीन धनराशि का भी बचाव किया।
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क्या बातचीत की गुंजाइश अभी भी बाकी है?
राष्ट्रपति ट्रंप के आक्रामक रुख के बावजूद अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी अब भी कूटनीतिक समाधान की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मनीला में कहा कि हम अब भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए तैयार हैं, लेकिन फिलहाल ईरान इस दिशा में गंभीर दिखाई नहीं देता है।


