US-Iran Deal Impact: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए आज (14 जून, 2026) एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकता है. इस समझौते के साथ ही फरवरी के आखिर से जारी उस जंग के खत्म होने की उम्मीदें फिर से तेज हो गई हैं, जिसके चलते वैश्विक तेल आपूर्ति को नुकसान पहुंचा है और पूरी दुनिया के सामने एक नई चुनौती पैदा हो गई है.
इन दो देशों के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान का कहना है कि समझौते का मसौदा पूरी तरह से तैयार है. ट्रंप ने कहा है कि समझौते के तुरंत बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘Strait of Hormuz’ को सभी अंतर्राष्ट्रीय जहाजों और तेल टैंकरों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा. अब सवाल आता है कि अगर वाकई में समझौते के बाद होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह से खोल दिया जाता है, तो इससे किन-किन देशों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?
सबसे ज्यादा फायदा पाने वाले आयातक देश
चीन- होर्मुज के खुलने से सबसे बड़ा फायदा चीन को होगा क्योंकि इस जलमार्ग से गुजरने वाले कुल तेल का 37.7% अकेला चीन आयात करता है. इसके बंद होने से चीन में कारोबार से लेकर आम जिंदगी पर भारी असर पड़ा है.
भारत- भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल (करीब 2.5-2.7 मिलियन बैरल) इसी रास्ते से मंगाता है. होर्मुज के खुलने से भारत का तेल के आयात पर बिल कम होगा, माल ढुलाई के खर्च में कमी आएगी और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर रखने में मदद मिलेगी.
दक्षिण कोरिया और जापान- दक्षिण कोरिया कुल तेल का 12% और जापान 10.9% हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से मंगाता है. होर्मुज के खुलने से इनके लिए भी ऊर्जा संकट पूरी तरह से टल जाएगा.
फायदे में रहने वाले निर्यातक देश
सऊदी अरब- होर्मुज के रास्ते से कुल तेल निर्यात में सऊदी अरब की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा37.2% है. इसके खुलने से बिना किसी रुकावट के सऊदी एशियाई देशों में अपने खरीदारों को तेल भेज सकेगा.
इराक और यूएई- तेल के कुल निर्यात में इराक 22.8% और संयुक्त अरब अमीरात 12.9% का योगदान रखता है. समुद्री नाकेबंदी हटने से इनका फंसा हुआ बिजनेस भी दोबारा से चालू हो जाएगा.
कतर- कतर दुनिया का सबसे बड़ा LNG और हीलियम का सप्लायर है. दुनिया का 20% एलपीजी कतर से इसी रास्ते से होकर आता है.
कुवैत- कुवैत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से होर्मुज पर ही टिकी हुई है. अमेरिका और ईरान के बीच अगर शांति समझौते पर मुहर लगती है, तो ईरान पर से अमेरिकी प्रतिबंध हटेंगे, जिससे वह अपने बंदरगाहों से आधिकारिक रूप से 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन से ज्यादा का तेल बेच पाएगा. इससे उसकी इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा.
वैश्विक बाजारों को राहत
होर्मुज से होकर अगर वापस से तेल और गैस की सप्लाई सुचारू रूप से होने लगे, तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से नीचे गिरेंगे. इसके अलावा, समुद्री जहाजों का बीमा प्रीमियम भी सस्ता होगा, जिससे दुनियाभर में मंहगाई कम होने में मदद मिलेगी.
ये भी पढ़ें:
Petrol-Diesel Price Cut: भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत में 3.1% की गिरावट, सरकार ने समझाया पूरा गणित

