अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को दुनिया भर में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। कई महीनों से जारी तनाव, सैन्य टकराव और समुद्री व्यापार में बाधाओं के बीच आए इस समझौते से पश्चिम एशिया में स्थिरता लौटने की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते की घोषणा के बाद कतर, तुर्किये, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस सहित कई देशों ने इसका स्वागत किया है। अंतरराष्ट्रीय नेताओं का मानना है कि यह समझौता न केवल क्षेत्रीय तनाव कम करेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री यातायात को भी राहत देगा। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा पूरी तरह खुलने की संभावना को इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धियों में माना जा रहा है।
दुनिया के नेताओं ने समझौते पर क्या प्रतिक्रिया दी?
समझौते की घोषणा के बाद विभिन्न देशों के नेताओं ने इसे शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करते हुए कहा कि भविष्य की वार्ताएं सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़नी चाहिए। तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने इसे क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि यह समझौता युद्ध समाप्त करने, क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने इस सफलता में शामिल मध्यस्थ देशों की भी सराहना की। आइए, विस्तार से और बिंदुवार तरीके से जानते हैं किसने क्या कहा…
कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी
- अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत किया।
- समझौते के लिए माहौल बनाने वाले क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय पक्षों की सराहना की।
- उम्मीद जताई कि आगे की वार्ताएं सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ेंगी।
- कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे स्थायी शांति और आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन
- समझौते को क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में अहम घटनाक्रम बताया।
- कहा कि पूरी दुनिया लंबे समय से ऐसी खबर का इंतजार कर रही थी।
- पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब के कूटनीतिक प्रयासों की प्रशंसा की।
- किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई से बचने की सलाह दी।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर
- समझौते को युद्ध समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
- होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर जोर दिया।
- तकनीकी वार्ताओं और समुद्री सुरक्षा प्रयासों में सहयोग की पेशकश की।
- कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाने चाहिए।
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज
- अमेरिका और ईरान दोनों को कूटनीतिक सफलता के लिए बधाई दी।
- कहा कि यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे सकता है।
- पश्चिम एशिया को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों
- समझौते को जल्द और पूरी तरह लागू करने की अपील की।
- होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी प्रतिबंध के तुरंत खोलने पर जोर दिया।
- कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन समुद्री यातायात बहाल करने में सहयोग देने को तैयार हैं।
- ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक कार्यक्रमों पर आगे बातचीत की आवश्यकता बताई।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
- गहन बातचीत के बाद समझौता संभव हो सका।
- दोनों पक्षों के सैन्य अभियान स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमत होने की जानकारी दी।
- बताया कि 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।
- कतर, सऊदी अरब और तुर्किये को मध्यस्थता में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस
- समझौते का स्वागत करते हुए इसे संघर्ष के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
- पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्किये की भूमिका की सराहना की।
- कहा कि यह समझौता आगे की वार्ताओं के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा।
- सभी पक्षों से समझौते को पूरी तरह लागू करने की अपील की।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो गया है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की बात कही।
- कहा की दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर दीजिए।
- समझौते को बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी
- शांति समझौते की पुष्टि की।
- कहा कि ईरान अमेरिका की प्रतिबद्धताओं का सत्यापन करेगा।
- युद्ध समाप्त करने, नाकाबंदी हटाने और ईरानी संपत्तियां जारी करने को महत्वपूर्ण शर्त बताया।
- समझौते को ईरान की कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता बताया।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार को कहा कि वह वाशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के औपचारिक हस्ताक्षर समारोह में शामिल होने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निर्भर करेगा कि वह स्वयं इसमें शामिल होते हैं या नहीं।
जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज को दिए एक फोन इंटरव्यू में बताया कि कार्यक्रम की तैयारियां अभी अंतिम चरण में नहीं हैं और लॉजिस्टिक्स पर काम जारी है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं समारोह में मौजूद रहेंगे, लेकिन यह भी संभव है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी वहां उपस्थित हों। व्हाइट हाउस की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अमेरिका का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, क्योंकि सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार आमतौर पर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों एक ही विदेशी कार्यक्रम में शामिल नहीं होते।


