अमेरिका भारत सहित अपने 60 व्यापारिक साझेदार देशों में बंधुआ मजदूरी से तैयार उत्पाद के संबंध में गुरुवार को अंतिम कार्रवाई रिपोर्ट जारी करेगा। अमेरिका ने इन देशों के खिलाफ धारा 301 के तहत जांच की थी। यह कदम सभी देशों पर लगाए गए 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ की समय-सीमा समाप्त होने से ठीक पहले उठाया जा रहा है। भारत ने इस जांच का विरोध करते हुए कहा था कि इन मुद्दों पर द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत ही चर्चा की जा सकती है।
यह भी पढ़ें- अमेरिका: ट्रांसजेंडर सैनिकों के इलाज व टेस्टोस्टेरोन नीति में क्या फर्क? जज ने ट्रंप प्रशासन पर उठाए सवाल
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने क्या कहा?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने सीनेट वित्त समिति को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के शीर्ष 60 व्यापारिक साझेदारों की ओर से अपनी सीमाओं पर बंधुआ मजदूरी से तैयार सामानों के आयात पर रोक न लगाने या उसे प्रभावी ढंग से लागू न कर पाने की जांच की गई थी। पिछले महीने यूएसटीआर ने देशों के मौजूदा उपायों की कड़ाई के आधार पर 10 फीसदी और 12.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया था। ग्रीर ने बताया कि यूएसटीआर को इस पर 1,600 से अधिक आपत्तियां-टिप्पणियां मिली हैं और 107 गवाहों के साथ दूसरे दौर की सुनवाई पूरी की जा चुकी है।
भारत ने जांच पर जताई आपत्ति, दूसरे देशों की भी जांच जारी
भारत ने अमेरिका की इस जांच का विरोध किया है। भारत का कहना है कि इस तरह के मुद्दों पर एकतरफा कार्रवाई करने के बजाय इन्हें भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। दोनों देशों के बीच इस समझौते पर फिलहाल बातचीत चल रही है। यूएसटीआर ने यह भी बताया कि अमेरिका एक दर्जन से अधिक देशों में अत्यधिक औद्योगिक उत्पादन क्षमता की भी जांच कर रहा है। हालांकि, इस मामले में अभी शुरुआती निष्कर्ष जारी नहीं किए गए हैं।
ट्रंप प्रशासन ने क्यों शुरू की थी जांच?
ट्रंप प्रशासन ने यह जांच उस समय शुरू की थी, जब फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल लगाए गए पारस्परिक शुल्क को अवैध करार दिया था। इसके बाद प्रशासन ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था, जिसकी अवधि शुक्रवार को खत्म हो रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार
अमेरिका, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार लगभग 141 अरब डॉलर का रहा। इसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर था।
सोडा ऐश पर भी उठा मुद्दा
सीनेट की सुनवाई के दौरान सीनेटर जॉन बरासो ने भारत में अमेरिकी सोडा ऐश (Soda Ash) उत्पादकों को बाजार तक उचित पहुंच मिलने का मुद्दा उठाया। इस पर ग्रीर ने कहा कि उनकी भारत के व्यापार मंत्रालय के अधिकारियों से अच्छी बातचीत होती है और वह अगली बैठक में यह मुद्दा उठाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत की भी अमेरिका की तरह व्यापारिक जांच और राहत संबंधी प्रक्रियाएं हैं और अमेरिका चाहता है कि वहां अमेरिकी कंपनियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार हो।
भारत ने शुरू की है एंटी-डंपिंग जांच
भारत ने 16 मार्च 2026 को दुनिया के कई देशों से आने वाले सोडा ऐश के आयात पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू की थी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि सस्ते आयात से घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंच रहा है या भविष्य में नुकसान की आशंका है।
टैरिफ के जरिए अमेरिका कर रहा नया समझौता- ट्रंप प्रशासन
ट्रंप प्रशासन व्यापारिक साझेदार देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि वे अपने बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलें, नियमों का बेहतर पालन करें और अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को फिर से मजबूत बनाया जा सके। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने बुधवार को सांसदों के सामने यह बात कही। जैमीसन ग्रीर ने इसे अमेरिका की नई व्यापार नीति बताया, जिसमें बराबरी के आधार पर समझौते किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर टैरिफ का दबाव बनाया जाएगा। ग्रीर ने सीनेट की वित्त समिति के सदस्यों से कहा कि टैरिफ सिर्फ सजा देने का तरीका नहीं है, बल्कि बातचीत में एक ऐसा साधन भी है जिससे अमेरिकी कंपनियों और कामगारों के लिए बेहतर बाजार पहुंच हासिल की जा सकती है।
यह भी पढ़ें- Pakistan: ईरान-यूएस मध्यस्थता की ‘कीमत’ लेगा पाकिस्तान? अमेरिका से मांगा 10 अरब डॉलर का आपातकालीन पैकेज
उन्होंने कहा, ‘हम टैरिफ का इस्तेमाल जारी रखेंगे और ऐसे समझौते करेंगे जो हमारी अर्थव्यवस्था में दोबारा उद्योगों को मजबूत करने, अमेरिकी कामगारों की रक्षा करने, उनकी आय बढ़ाने और व्यापार घाटे को कम करने में मदद करेंगे’। ग्रीर ने दावा किया कि प्रशासन की यह नीति पहले से ही अच्छे नतीजे दे रही है। टैरिफ और समझौतों के मेल से राष्ट्रपति की व्यापार नीति ने जल्दी और प्रभावशाली परिणाम दिए हैं। ग्रीर के अनुसार, अमेरिका अब तक 19 ऐसे ढांचे वाले या बराबरी के आधार पर किए गए व्यापार समझौते कर चुका है, जो दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था (जीडीपी) के 32 प्रतिशत हिस्से को कवर करते हैं।

