आर्थिक संकट, आतंकवाद और वैश्विक स्तर पर गिरती साख से जूझ रहा पाकिस्तान अमेरिका में अपनी छवि सुधारने और रणनीतिक हित बचाने के लिए बड़े पैमाने पर लॉबिंग ऑपरेशन चला रहा है. एबीपी न्यूज़ के हाथ पाकिस्तान की सरकार का एक गोपनीय दस्तावेज लगा है.
डॉक्यूमेंट में क्या है?
इस डॉक्यूमेंट में बताया गया है कि पाकिस्तान के अमेरिका स्थित दूतावास और वॉशिंगटन डीसी ने अमेरिकी लॉबिंग फर्म (इरविन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप एलएलसी) के बीच 1 मई को 11 करोड़ रुपयों का एक करार हुआ है, जिसके तहत ये अमेरिकी लॉबिंग फर्म पाकिस्तान के के फायदे के लिए व्हाइट हाउस, अमेरिकी कांग्रेस, अमेरिकी मीडिया और अमेरिकी थिंक टैंक में सक्रिय लॉबिंग करेगी.
एबीपी के पास एक्सक्लूसिव कॉपी
9 पन्ने के इस समझौते की एक्सक्लूसिव कॉपी एबीपी न्यूज के पास मौजूद है, जिसके तहत अमेरिकी लॉबिंग फर्म अमेरिकी कांग्रेस के उन सांसदों और स्टाफ को पाकिस्तान के पक्ष में करेगी जो विदेश नीति, रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यापार और फंडिंग से जुड़ी कमेटियों में शामिल हैं. साथ ही फर्म को ये भी जिम्मेदारी दी गई है कि वह अमेरिकी सांसदों, वाइट हाउस, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और व्यापार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पाकिस्तान के पक्ष में मीटिंग, ब्रीफिंग और रणनीतिक चर्चाएं आयोजित करे.
इरविन ग्रेव्स स्ट्रेटेजी ग्रुप के सीईओ पूर्व अमेरिकी सांसद टॉम ग्रेव्स हैं, जिनका ताल्लुक अमेरिका की सत्ता पर काबिज रिपब्लिकन पार्टी से है. साथ ही 2010 से 2020 तक टॉम ग्रेव्स अमेरिकी कांग्रेस के सांसद रहे हैं. समझौते पर लॉबी ग्रुप इरविन ग्रेव्स स्ट्रेटेजी ग्रुप के सीईओ टॉम ग्रेव्स और पाकिस्तान के अमेरिका में राजदूत रिजवान शेख सईद के हस्ताक्षर हैं. समझौते में तय हुआ है कि इरविन ग्रेव्स स्ट्रेटेजी ग्रुप नाम की अमेरिकी लॉबिंग कंपनी पाकिस्तान के लिए केवल कांग्रेस ही नहीं बल्कि व्हाइट हाउस और अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी पाकिस्तान की पहुंच बढ़ाने का काम करेगी.
समझौते में क्या लिखा?
समझौते में लिखा है कि फर्म अमेरिकी एग्जीक्यूटिव ब्रांच एजेंसी यानी राष्ट्रपति प्रशासन के अधीन आने वाले विभागों और संस्थाओं के साथ पाकिस्तान के लिए उच्च स्तरीय संपर्क बढ़ाएगी. जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय, व्यापार मंत्रालय, EXIM बैंक और अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त सहयोग शामिल है. जिससे अमेरिका की इन संस्थाओं में पाकिस्तान का सीध दखल बढ़ पाये.
पाकिस्तान के लिए लॉबिंग करेगी फर्म
समझौते के मुताबिक पाकिस्तान के लिए लॉबिंग करने वाली ये फर्म ‘कांग्रेसनल पाकिस्तान कॉकस’ को मजबूत करने और उसमें अधिक सांसद जोड़ने का काम करेगी, साथ ही पाकिस्तान के राजदूत की बड़े अमेरिकी अधिकारियों और संसदों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की व्यवस्था करेगी, जिसमें रिसेप्शन, राउंडटेबल, नेटवर्किंग इवेंट और बंद कमरे की नीति चर्चाएं शामिल होंगी.
समझौते के तहत लॉबी फर्म अमेरिकी सांसदों और उनके स्टाफ की पाकिस्तान यात्राओं के लिए तैयार करेगी और इन यात्राओं के जरिए पाकिस्तान अमेरिकी सांसदों के लिए ‘ग्राउंड नैरेटिव’ पर काम करेगा, यानी उन्हें वो पाकिस्तान की वो क्षवि दिखाएगा जो पाकिस्तान चाहता है साथ ही अमेरिकी संसदों को पाकिस्तान की यात्रा करवाने के लिए तैयार करने के लिए इरविन ग्रेव्स स्ट्रेटेजी ग्रुप अमेरिकी कांग्रेस के संसदों को ब्रीफिंग देगी और यात्रा का समन्वय संभालेगी.
प्रभावशाली समूहों तक पहुंच बनाना मकसद
दस्तावेज के मुताबिक पाकिस्तन कांग्रेसनल ब्लैक कॉकस, कांग्रेसनल हिस्पैनिक कॉकस और कांग्रेसनल एशियन पैसिफिक अमेरिकन कॉकस जैसे प्रभावशाली समूहों तक भी अपनी पहुंच बनाना चाहता है, जिससे वो अमेरिकी राजनीति के विभिन्न प्रभावशाली ब्लॉकों में एक पाकिस्तान समर्थक नेटवर्क तैयार कर पाए और इस काम की जिम्मेदारी भी यही फर्म संभालेगी.
पाकिस्तान को पता है कि दुनियाभर में उसकी छवि आतंक को पालने पोसने और निर्यात करने वाले देश की है ऐसे में लॉबी फर्म के साथ समझौते के मुताबिक ये लॉबी फर्म पाकिस्तान के लिए मीडिया मैनेजमेंट और नैरेटिव निर्माण के लिए भी काम करेगी. जिसमें अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म्स, एडिटोरियल बोर्ड्स और पॉलिसी पब्लिकेशन्स के जरिए पाकिस्तान की सकारात्मक छवि बनाने की कोशिश की जाएगी और पाकिस्तान के पक्ष में आर्टिकल्स छपवाए जाएँगे, पब्लिक कमेंट्री करवाई जाएगी और बहसों को प्रभावित किया जाएगा.
ये फर्म अमेरिकी नीति को प्रभावित करने वाले पूर्व सरकारी अधिकारी, थिंक टैंक, शिक्षाविद और नीति विश्लेषको को भी पाकिस्तान के पक्ष में करेगी, अमेरिकी सरकार पाकिस्तान के पक्ष में नीति बनाये. पाकिस्तान जो दशकों से आतंकवादी संगठनों को संरक्षण दे रहा है, आतंकी नेटवर्क चला रहा है, उसने समझौते के मुताबिक फर्म को काम दिया है कि लॉबी फर्म अमेरिका में पाकिस्तान को ‘रीजनल स्टेबिलिटी’, ‘काउंटर टेररिज्म’ और ‘डेमोक्रेटिक एंगेजमेंट’ के क्षेत्र में एक ‘विश्वसनीय साझेदार’ के रूप में पेश करे और अफगानिस्तान से पाकिस्तान के खिलाफ पैदा होने वाले कथित आतंकी खतरों को अमेरिकी नीति निर्माताओं के सामने प्रमुखता से उठाया जाए ताकि पाकिस्तान का पक्ष मजबूत हो.
डिफेंस-सिक्योरिटी में सहयोग की जिम्मेदारी
दस्तावेज में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर भी लॉबी फर्म को जिम्मेदारी दी गई है कि पाकिस्तान चाहता है कि अमेरिका उसके साथ सुरक्षा सहयोग कार्यक्रमों को जारी रखे और उसे ‘प्रमुख गैर नाटो सहियोगी’ का दर्जा दे. साथ ही फर्म उन मानवाधिकार से जुड़े प्रस्तावों और कानूनों पर नजर रखेगी, जो पाकिस्तान पर प्रतिबंध या उसे मिलने वाली सुरक्षा सहायता राशि पर असर डाल सकते हैं.
समझौते के मुताबिक लॉबी फर्म पाकिस्तान के लिए Leahy Laws से जुड़े मामलों और लोगो की मॉनिटरिंग भी करेगी, जो वो अमेरिकी कानून हैं , जिसके तहत सैनिकों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन में शामिल देशों को मिलने वाली अमेरिकी सहायता रोकी जा सकती है. इससे साफ संकेत मिलता है कि पाकिस्तान अमेरिकी सिस्टम के भीतर अपने खिलाफ उठने वाले मानवाधिकार और सुरक्षा संबंधी मुद्दों को भी मैनेज करना चाहता है.
डील में आर्थिक लॉबिंग पर जोर
समझौते में पाकिस्तान की आर्थिक लॉबिंग को भी विशेष महत्व दिया गया है, जिसके तहत रेयर अर्थ मिनरल्स, क्रिटिकल मिनरल्स, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी निवेश आकर्षित करने के लिए लॉबी फर्म अमेरिकी निवेशकों, कॉर्पोरेट समूहों और कंपनियों को पाकिस्तान में निवेश के लिए प्रेरित करेंगी. साथ ही समझौते के ‘थर्ड पार्टी वैलिडेशन स्ट्रैटेजी’ नाम के सेक्शन में साफ लिखा है कि फर्म ऐसे प्रभावशाली चेहरों की पहचान करेगी जो पाकिस्तान को ‘रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साझेदार’ के रूप में अमेरिका की सरकार के सामने पेश करेंगे.
पाकिस्तान फर्म को हर महीने देगा 50 हजार डॉलर
1 मई 2026 से लागू हुए इस समझौते के तहत पाकिस्तान अगले 2 साल तक इस लॉबी फर्म को 50 हजार डॉलर यानी 48 लाख भारतीय रुपये (1 करोड़ 40 लाख पाकिस्तानी रुपये ) हर महीने देगा. यानी 2 साल में पाकिस्तान इस एक अमेरिकी लॉबी फर्म पर 12 लाख डॉलर यानी 11 करोड़ भारतीय रुपये (33 करोड़ 42 लाख पाकिस्तानी रुपये) खर्च करेगा और पाकिस्तान ने इसी महीने की शुरुआत में ही तीन महीने की एडवांस पेमेंट लॉबी फर्म को अमेरिकी सत्ता, कांग्रेस, मीडिया, थिंक टैंक और कॉर्पोरेट नेटवर्क के भीतर अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए दे दिया है.
करोड़ों रुपये खर्च करने के पीछे पाक का क्या मकसद?
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान लॉबिंग के ऊपर करोड़ों रुपये खर्च करके ना सिर्फ अपनी छवि बेहतर करेगा बल्कि भारत के खिलाफ अमेरिकी नीति और नैरेटिव को प्रभावित करने की कोशिश करेगा. जिसमें अमेरिकी कांग्रेस के संसदों भारत के खिलाफ से कश्मीर के मुद्दे पर, मानवाधिकार, क्षेत्रीय सुरक्षा बयान दिलवाने, थिंक टैंक और अमेरिकी मीडिया पर भारत के खिलाफ खबरें छपवाने का काम किया जा सकता है और पाकिस्तान को आतंकवाद से पीड़ित देश बताने की कोशिश की जा सकती है.


