लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

US-ईरान वॉर ने बढ़ाई टेंशन, भारत से मुंह फेर रहे विदेशी पर्यटक; टूरिज्म और हवाई यात्रा को 18000 करोड़ का झटका

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

  • पश्चिम एशिया युद्ध से भारतीय पर्यटन, विमानन, होटल पर असर.
  • विदेशी पर्यटकों में 15-20% कमी, एविएशन को 18,000 करोड़ का नुकसान.
  • रेस्तरां कारोबार पर दोहरा संकट, 10% बंद, 79,000 करोड़ का मासिक घाटा.
  • घरेलू पर्यटन से सहारा, सरकार से टैक्स कटौती, नए मार्ग के सुझाव.

War Impact on Tourism Sector: पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने अपनी नई रिपोर्ट में बताया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने भारत के टूरिज्म, हवाई सफर और होटल-रेस्तरां के कारोबार को काफी नुकसान पहुंचाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में 15 से 20 प्रतिशत की कमी आ गई है और एविएशन सेक्टर को करीब 18,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा परेशानी रेस्तरां वाले कारोबार को हुई है. रिपोर्ट कहती है कि लगभग 10 प्रतिशत रेस्तरां बंद हो चुके हैं और हर महीने इनके कारोबार में 79,000 करोड़ रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई है.

जीडीपी में इसका योगदान 

भारत में टूरिज्म और होटल इंडस्ट्री का देश की जीडीपी में 8 प्रतिशत का योगदान है और यह 4 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देती है. साल 2025 में यह सेक्टर बहुत अच्छी रिकवरी कर चुका था. ब्रांडेड होटलों में कमरों की संख्या लगभग 2 लाख पहुंच गई थी और घरेलू उड़ानों में रोजाना 5 लाख से ज्यादा यात्री सफर कर रहे थे. लेकिन 2026 की शुरुआत में पश्चिम एशिया का युद्ध भड़कने के बाद सारी स्थिति बदल गई.

हवाई यात्रा सबसे ज्यादा प्रभावित

PHDCCI रिपोर्ट में कहा गया है कि हवाई कंपनियों पर सबसे गहरा असर पड़ा है. कई उड़ानें रद्द हो गईं, कुछ हवाई क्षेत्र बंद हो गए और रास्ते बदलने पड़े. इस वजह से विदेश वाली उड़ानों में 2 से 4 घंटे ज्यादा समय लगने लगा. ईंधन की खपत बढ़ने से खर्च बहुत बढ़ गया. हवाई कंपनियों की कुल लागत में ईंधन का हिस्सा 35 से 40 प्रतिशत होता है. मिडिल ईस्ट के व्यस्त हवाई रास्ते बाधित होने से टिकटों के दाम भी बढ़ गए हैं.

विदेशी पर्यटक घबरा गए

विदेश से घूमने आने वाले लोग अब कम आ रहे हैं, खासकर छुट्टियों में घूमने वाले. इस रिपोर्ट को अनुसार, वैश्विक यात्री भू-राजनीतिक तनाव से सतर्क हो गए हैं. भारतीय यात्री भी अब दूर की जगहों की बजाय थाईलैंड, सिंगापुर और वियतनाम जैसे पास के देशों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. वहीं, होटल का कारोबार अभी घरेलू पर्यटकों के सहारे चल रहा है. होटलों में कमरे भरने की दर ठीक बनी हुई है, लेकिन बिजली-पानी की महंगाई और विदेशी मेहमानों के कम आने से मुनाफा दबाव में है.

रेस्तरां कारोबार पर दोहरा संकट

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों की कीमतें 10-15 प्रतिशत बढ़ गई हैं. बाहर से आने वाली सामग्री, परिवहन और बिजली महंगी होने से छोटे-मध्यम रेस्तरां वाले खासे परेशान हैं. टूरिस्ट जगहों पर महंगे रेस्तरां में विदेशी ग्राहक घट गए हैं. हालांकि, देश के अंदर के लोग और फूड डिलीवरी (जो कई बड़े रेस्तरां की 20-30 प्रतिशत आय है) से कुछ राहत मिल रही है.

घरेलू पर्यटन ने दिया सहारा

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि देश के अंदर घूमने वाले पर्यटक ही इस समय सबसे बड़ा बल है. लोग अभी भी छुट्टियों में घूमने, होटल में आराम करने और अच्छा खाना खाने पर पैसे खर्च कर रहे हैं.

सरकार से ये जरूरी सुझाव

PHDCCI ने सरकार से कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं जैसे युद्ध वाले इलाकों पर कम निर्भर रहना, नए हवाई रास्ते विकसित करना, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), होटल और खाने-पीने वाले क्षेत्र पर टैक्स कम करना, छोटे कारोबारियों को आसानी से सस्ता लोन देना. इसके अलावा घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देना, वीजा प्रक्रिया आसान बनाना और दूसरे देशों में भारत की अच्छी तरीके से मार्केटिंग करना भी जरूरी बताया गया है.

रिपोर्ट का आखिरी निष्कर्ष यह है कि भले ही पश्चिम एशिया का युद्ध अभी कुछ मुश्किलें पैदा कर रहा हो, लेकिन यह भारत के लिए अपने टूरिज्म क्षेत्र को और मजबूत, विविध और आत्मनिर्भर बनाने का अच्छा मौका भी है. मजबूत घरेलू मांग और सरकार-उद्योग के साथ मिलकर काम करने से यह क्षेत्र जल्दी संभल सकता है और भविष्य में तेजी से बढ़ सकता है.

ये भी पढ़ें:

कच्चा तेल के कारण महंगी होगी आपकी EMI, यूनियन बैंक की इस रिपोर्ट से मिडिल क्लास को लगेगा सदमा 

Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment