UPI Payments Charge: अगर आप हर दिन चाय, सब्जी, किराना, कैब या ऑनलाइन शॉपिंग के लिए UPI इस्तेमाल करते हैं, तो पिछले कुछ दिनों में आपके मन में भी यह सवाल जरूर आया होगा कि क्या अब UPI पर पैसे लगने वाले हैं?
सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे चल रहे थे. राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा हुई ! इसी शोर के बीच Payments Council of India यानी PCI ने सफाई जारी की है और तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है.
सबसे पहले सीधा जवाब
PCI का कहना है कि आम ग्राहकों से UPI इस्तेमाल करने के लिए फिलहाल कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा. छोटे दुकानदारों पर भी कोई शुल्क लागू नहीं है यानी आपके रोज के लेनदेन में अभी कुछ भी नहीं बदल रहा.
लेकिन साथ में PCI ने एक और बात कही ! उसने कहा कि UPI जैसे विशाल नेटवर्क को लंबे समय तक चलाते रहने के लिए इसके आर्थिक मॉडल पर बातचीत जरूरी है. यहीं से MDR का जिक्र आया और इसी को लोगों ने चार्ज लगने की खबर मान लिया.
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पहले यह समझिए कि MDR क्या होता है
MDR यानी Merchant Discount Rate. यह वह शुल्क होता है जो कोई दुकानदार या व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले पेमेंट कंपनी को देता है. इसे ऐसे समझिए. मान लीजिए आपने किसी दुकान पर सौ रुपये का सामान कार्ड या डिजिटल तरीके से खरीदा. अगर उस पर एक फीसदी MDR लगता है तो दुकानदार के खाते में सौ रुपये नहीं 99 रुपये पहुंचते हैं. एक रुपया पेमेंट सिस्टम चलाने वाली कंपनियों और बैंक के पास जाता है. ध्यान रखिए यह पैसा ग्राहक की जेब से नहीं कटता यह व्यापारी की कमाई से कटता है. क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर आज भी MDR लगता है. लेकिन UPI पर नहीं लगता और यही असली मुद्दा है.
UPI पर MDR क्यों नहीं लगता
जनवरी 2020 में सरकार ने UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR को पूरी तरह शून्य कर दिया था. मकसद साफ था कि डिजिटल भुगतान देश के कोने-कोने तक पहुंचे और छोटे से छोटा दुकानदार भी बिना किसी डर के इसे अपनाए. यह फैसला काम कर गया. इसके बाद UPI का इस्तेमाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और आज हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन इसी नेटवर्क से होते हैं.
तो फिर बहस क्यों छिड़ी
UPI अब सिर्फ एक ऐप नहीं बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है. जैसे-जैसे इसका इस्तेमाल बढ़ा वैसे-वैसे इसे चलाने की लागत भी बढ़ती चली गई. इस खर्च में हाई-टेक सर्वर और नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, फ्रॉड पकड़ने वाली तकनीक, नए फीचर्स का विकास, ग्राहक सहायता और नियमों के पालन पर होने वाला खर्च शामिल है. यह सब चौबीसों घंटे चलता रहता है और इस पर लगातार पैसा लगता है.
PCI के मुताबिक फिलहाल यह पूरा खर्च बैंक, NPCI, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और फिनटेक कंपनियां मिलकर उठा रही हैं. इंडस्ट्री का एक हिस्सा लंबे समय से कह रहा है कि बिना किसी कमाई के मॉडल के इतने बड़े सिस्टम को हमेशा चलाते रहना मुश्किल होता जा रहा है. इसी वजह से MDR की चर्चा दोबारा तेज हुई.
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तो क्या आम ग्राहक से पैसे लिए जाएंगे
नहीं. PCI का कहना है कि 2016 में UPI शुरू होने के बाद से यह सेवा ग्राहकों के लिए मुफ्त रही है और अभी इसमें कोई बदलाव नहीं हो रहा. आप किसी को पैसे भेजें या QR कोड स्कैन करके भुगतान करें आपको अलग से कोई ट्रांजैक्शन फीस नहीं देनी होगी. और यह भी समझ लीजिए कि MDR कभी भी ग्राहक से नहीं लिया जाता. वह व्यापारी और पेमेंट कंपनी के बीच की व्यवस्था है.
छोटे दुकानदारों का क्या होगा
PCI ने साफ किया है कि छोटे दुकानदारों और किराना स्टोर्स से UPI स्वीकार करने पर कोई MDR नहीं लिया जाता और यह व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी. सरकार की नीति शुरू से यही रही है कि छोटे कारोबारी बिना किसी लागत के डिजिटल लेनदेन से जुड़ें.
फिर आगे क्या हो सकता है
PCI ने एक संभावना से इनकार नहीं किया है. उसका कहना है कि अगर भविष्य में बड़े व्यापारियों और पेमेंट कंपनियों के बीच कोई Merchant Service Charge तय होता भी है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि ग्राहकों से UPI का पैसा लिया जाएगा. यानी बहस का केंद्र आम आदमी या मोहल्ले की दुकान नहीं है बल्कि बड़ी कंपनियां और बड़े कारोबारी हैं.
PCI का संदेश दो हिस्सों में है
पहला – आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए अभी कुछ नहीं बदल रहा और UPI पहले की तरह मुफ्त रहेगा.
दूसरा – UPI अब देश का अहम डिजिटल ढांचा बन चुका है इसलिए इसे सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए एक टिकाऊ आर्थिक मॉडल पर बातचीत आगे भी चलती रहेगी.
UPI पर चार्ज लगने की खबरों के बीच PCI की सफाई से इतना साफ हो गया है कि आम लोगों को फिलहाल कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा. हालांकि यह सवाल बना रहेगा कि इतने बड़े नेटवर्क का खर्च आखिर कौन उठाए और इसे आगे आर्थिक रूप से टिकाऊ कैसे बनाया जाए. यही सवाल आने वाले समय में सरकार, बैंकिंग सेक्टर और फिनटेक कंपनियों के बीच चर्चा का केंद्र रहेगा.


