अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन और ताइवान के बीच चल रहे भारी तनाव को लेकर एक बहुत बड़ा बयान दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस समय अमेरिका को किसी भी युद्ध की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, खासकर ऐसे युद्ध की जो 9,500 मील दूर हो। यह बयान वैश्विक राजनीति और कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने यह बात एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही, जहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी लंबी और अहम चर्चाओं का खुलासा किया।
ट्रंप ने आगे बताया कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ताइवान और ईरान के मुद्दे पर बहुत गहराई से बातचीत की है। ट्रंप ने कहा कि शी जिनपिंग ताइवान की आजादी की लड़ाई के सख्त खिलाफ हैं, क्योंकि ऐसा होने पर एक बहुत बड़ा और खतरनाक टकराव हो सकता है। ट्रंप ने शी जिनपिंग की तारीफ करते हुए उन्हें एक शानदार व्यक्ति बताया। ट्रंप ने कहा कि जब ताइवान का मुद्दा उठा, तो उन्होंने सिर्फ शी जिनपिंग की बात सुनी और उस पर अपनी तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की।
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1982 के समझौते और हथियारों की बिक्री पर ट्रंप ने क्या कहा?
पत्रकारों ने जब ट्रंप से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा 1982 में दिए गए उस भरोसे के बारे में पूछा, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ताइवान को हथियार बेचने पर चीन से सलाह नहीं लेगा, तो ट्रंप ने इसका बेबाकी से जवाब दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि 1982 अब बहुत पुरानी बात हो चुकी है। उन्होंने साफ किया कि बातचीत के दौरान खुद चीनी राष्ट्रपति ने यह मुद्दा उठाया था। ट्रंप ने कहा कि वे 1982 के समझौते का हवाला देकर बातचीत से पीछे नहीं हट सकते थे। इसलिए दोनों नेताओं ने ताइवान और उसे हथियारों की बिक्री के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। ट्रंप ने कहा कि इस पर वह जल्द ही कोई फैसला लेंगे, लेकिन अभी 9,500 मील दूर एक युद्ध अमेरिका की आखिरी जरूरत है।
क्या अमेरिका अपनी सेना ताइवान भेजेगा?
जब राष्ट्रपति ट्रंप से यह सीधा सवाल पूछा गया कि अगर ताइवान पर कोई संकट आता है, तो क्या अमेरिका अपनी सेना वहां भेजेगा? इस पर ट्रंप ने कोई भी साफ जवाब देने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने कहा कि इस बात का जवाब सिर्फ उन्हें पता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने बताया कि यही सवाल खुद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी उनसे पूछा था कि क्या अमेरिका ताइवान की रक्षा करेगा? इसके जवाब में ट्रंप ने शी जिनपिंग से भी यही कहा था कि वह इन मामलों पर खुलकर बात नहीं करते हैं।
होर्मुज जलमार्ग और ईरान को लेकर ट्रंप ने क्या दावा किया?
ताइवान के अलावा ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच ईरान और होर्मुज जलमार्ग को लेकर भी अहम चर्चा हुई। ट्रंप ने दावा किया कि शी जिनपिंग खुद ईरान पर दबाव डालेंगे ताकि होर्मुज का रास्ता खुला रहे। इसका कारण यह है कि चीन को अपना लगभग 40 प्रतिशत तेल होर्मुज जलमार्ग से ही मिलता है, जबकि अमेरिका को वहां से बिल्कुल तेल की जरूरत नहीं है। इसके अलावा, ट्रंप ने यह भी बताया कि व्यापार के मुद्दे पर चीन के साथ उनकी बहुत अच्छी सहमति बनी है, जिससे अमेरिकी किसानों को बहुत फायदा मिलेगा। वहीं, चीनी दूतावास ने भी बयान जारी कर कहा है कि दोनों देश रणनीतिक स्थिरता का एक रचनात्मक संबंध बनाने पर सहमत हुए हैं।


