फरवरी में अमेरिकी शीर्ष कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ रद्द करने के बाद ट्रंप ने उसकी जगह अस्थायी आयात कर लागू किए। ये अस्थायी कर अब तीन माह से भी कम समय में खत्म हो रहे हैं। ट्रंप प्रशासन अब अमेरिकी राजकोष में राजस्व प्रवाह बनाए रखने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के चारों ओर राष्ट्रपति की संरक्षणवादी नीति को मजबूत करने के लिए अधिक स्थायी टैरिफ लागू करने के प्रयास कर रहा है।
इस सप्ताह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय दो जांचों की सुनवाई करेगा। उम्मीद है कि इससे अमेरिकी टैरिफ का नया दौर शुरू होगा। ये कर आयातकों द्वारा अमेरिका में चुकाए जाते हैं और आमतौर पर ऊंचे दामों से उन उपभोक्ताओं पर डाले जाते हैं जो पहले से ही महंगाई से परेशान हैं। ट्रंप के नवीनतम टैरिफ प्रस्ताव को अदालतों में और अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए प्रस्ताव से अधिक मजबूत साबित होने की संभावना है।
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साझेदारों के उत्पादन पर होगी सुनवाई
ट्रंप प्रशासन इस बात पर भी सुनवाई करेगा कि क्या अमेरिका के चीन, ईयू और जापान समेत 16 व्यापारिक साझेदार जरूरत से ज्यादा सामान का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे दाम गिर रहे हैं और अमेरिकी निर्माताओं को नुकसान हो रहा है। जिनकी जांच हो रही है, वे अमेरिका के 70% आयात का हिस्सा हैं। एक बार फिर, इस जांच के चलते नए टैरिफ लग सकते हैं।
किन चीजों पर लगाया था टैरिफ?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 2026 में वैश्विक व्यापार को फिर से आकार देने के लिए आक्रामक टैरिफ नीतियां अपनाई थीं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने 24 फरवरी 2026 से अधिकांश देशों पर 10% का नया वैश्विक टैरिफ लगाया था, जो 150 दिनों के लिए वैध है। इसके अलावा, स्टील/एल्युमीनियम पर 25% शुल्क और चुनिंदा फार्मा उत्पादों पर 100% तक टैरिफ का प्रस्ताव है।
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