देहरादून में बवाल:पानी से भड़की चिंगारी, जल गए आशियाने; मिश्रित आबादी में इसलिए भड़क उठी हिंसा – Dehradun Bairagiwala Scarred By Violence After Water Dispute Escalates Into Tragedy
देहरादून के बैरागीवाला गांव में पानी से भड़की आग आशियानों तक को जलाकर राख कर देगी इसका अंदाजा किसी को नहीं था। खेत में पानी लगाने के विवाद में पहले एक घर का चिराग बुझा तो अगले ही पल यहां हिंसा भड़क उठी।
एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के आशियानों को ही आग के हवाले कर दिया। मिश्रित आबादी वाले इस गांव में अब दोनों समुदायों में एक गहरी खाई ने जन्म ले लिया। कभी एक-दूसरे के सरोकार में भाग लेने वाले ये समुदाय शायद ही वर्षों तक इस खाई को पाट पाएं।
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पुलिसकर्मियों को देख खेतों में दौड़ते पथराव कर रहे लोग
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर के सहसपुर कस्बे से बैरागीवाला गांव करीब पांच किमी दूर बसा है। इस गांव की आबादी लगभग ढाई हजार के आसपास है। मासूम के बेटों और विनोद के परिवार में पुरानी अदावत थी लेकिन बाकी आबादी एक-दूसरे के साथ सौहार्द से रहती थी। एक-दूसरे के विवाह या अन्य मांगलिक कार्यों में भी इन दोनों परिवार के अलावा सब शिरकत करते थे लेकिन शनिवार की शाम यहां सब कुछ बदल गई।
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बैरागीवाला में हुई घटना के बाद लोगों ने आरोपियों के घर में लगाई आग
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विनोद कश्यप और अमन के भाइयों में पानी लगाने के लिए हुए विवाद में विनोद की जान चली गई। देखते ही देखते इस गांव में पहले जैसा कुछ न रहा। लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। रात के वक्त पुलिस ने बहुत कुछ संभालने का प्रयास किया लेकिन सुबह होते ही विवाद की चिंगारी ने संघर्ष की आग का रूप ले लिया।
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घर में लगी आग को बुझाते फायर कर्मी
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हिंदू पक्ष के लोगों ने आरोपियों के घर को आग के हवाले कर दिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार अमन और उसके भाइयों से उनके समुदाय के कुछ लोग भी बहुत ज्यादा राफ्ता नहीं रखते थे। हालांकि, इस संघर्ष को देखने से लग रहा है कि घटना के बाद गांव के सामाजिक ताने बाने में भी चाक बन गए हैं।
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बैरागीवाला में हुई घटना के बाद लोगों ने आरोपियों के घर में लगाई आग
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बागवान छोड़ गए बाग
गांव के पास में ही आम का बड़ा बाग है। यहां आम की बहार है जिसकी रखवानी के लिए दर्जनों बागबान रहते थे। यहां रविवार को जब हिंसा भड़की तो पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने इस बाग में छावनी बना ली। ऐसे में जान की परवाह करते हुए बागबानों को भी यहां से जाना पड़ा।