घरेलू शेयर बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के फैले के दिन बड़ा उतार-चढ़ाव दिखा। शुरुआती कारोबार में मजबूती के बावजूद बाजार में निवेशकों के बीच भ्रम की स्थिति दिखी, जिससे उतार-चढ़ाव को बढ़ावा मिला। आखिरकार प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर बंद हुए।

30 शेयरों वाला सेंसेक्स 116.67 (-0.15%) अंकों की गिरावट के साथ 74,243.34 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर, 38 शेयरों का निफ्टी 49.85 (-0.21%) अंक टूटकर 23,366.70 के स्तर पर बंद हुआ। आरबीआई के नीतिगत फैसले के एलानों के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले 79 पैसे बढ़कर 94.95 (अस्थायी) पर बंद हुआ। विप्रो और हिंडाल्को लगभग तीन-तीन प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
5.25% पर स्थिर रहा रेपो रेट, महंगाई बढ़ने की चिंता ने बढ़ाया तनाव
शेयर बाजार में इस उतार-चढ़ाव और असमंजस की मुख्य वजह शुक्रवार को आए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले रहे। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ऐलान किया कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से प्रमुख नीतिगत दर (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने और ‘तटस्थ’ रुख अपनाने का निर्णय लिया है।
दरें स्थिर रहने के बावजूद बाजार की धारणा पर उस समय दबाव पड़ा, जब केंद्रीय बैंक ने वैश्विक अनिश्चितताओं और उच्च ऊर्जा कीमतों का हवाला देते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई (सीपीआई) का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया। गवर्नर मल्होत्रा ने आश्वस्त किया कि भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति मजबूत है, लेकिन आपूर्ति में बाधाओं और संभावित अल नीनो (अल नीनो) के कारण महंगाई पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर केंद्रीय बैंक पूरी तरह से सतर्क है।
