भारतीय शेयर बाजार बुधवार को गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में कमी दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में अस्थिर राजनीतिक उठापटक के बीच कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ रहे हैं। बाजार का ध्यान अब अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है।
ये आंकड़े बुधवार को ही जारी होने वाले हैं। महंगाई के इन आंकड़ों से वैश्विक ब्याज दर की उम्मीदों पर नए संकेत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, ये आंकड़े व्यापक बाजार धारणा को भी प्रभावित करेंगे। बुधवार को सुबह 09:27 बजे, सेंसेक्स 70.98 अंक या 0.09 फीसदी गिरकर 78,083.27 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी भी 55.41 अंक या 0.23 फीसदी की गिरावट के साथ 24,416.30 पर था। भारतीय बाजार में हिंडाल्को के शेयरों में दो फीसदी की वृद्धि देखी गई। वहीं, बजाज फिनसर्व के शेयरों में एक फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की नजर अब अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर टिकी है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें क्यों चिंता का विषय हैं?
पश्चिम एशिया में जारी अस्थिर राजनीतिक उठापटक के कारण कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। यह 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। तेल की ऊंची कीमतें कंपनियों की लागत बढ़ाती हैं। यह उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को भी कम करती हैं।
अमेरिकी सीपीआई डेटा का क्या महत्व है?
अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़े वैश्विक बाजारों के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह आंकड़े बुधवार को जारी होने वाले हैं। इनसे पता चलेगा कि अमेरिका में महंगाई की स्थिति क्या है। इन आंकड़ों के आधार पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर निर्णय ले सकते हैं। ब्याज दरों में बदलाव का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ता है। इसलिए निवेशक इन आंकड़ों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
वैश्विक बाजारों का हाल कैसा रहा?
टोक्यो समय के अनुसार सुबह 10:38 बजे एसएंडपी 500 वायदा लगभग अपरिवर्तित रहा। जापान का निक्केई 225 वायदा 0.3 फीसदी गिर गया। जापान का टॉपिक्स सूचकांक 0.4 फीसदी बढ़ा। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक 0.5 फीसदी नीचे आया। हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 0.8 फीसदी गिर गया। शंघाई कंपोजिट लगभग अपरिवर्तित रहा।


