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The Bonus Market Update:शेयर बाजार में नरम शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी शुरुआती सुस्ती के बाद संभले – Sensex Opening Bell Share Market Opening Sensex Nifty Share Market News And Updates

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घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार की सुबह नरम शुरुआत हुई। बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी उतार-चढ़ाव के बाद गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे।शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 111.23 अंक गिरकर 77,044.39 पर आ गया; निफ्टी 26.85 अंक गिरकर 24,058.85 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 21 पैसे गिरकर 94.71 पर आ गया।

गुरुवार को शेयर बाजार और रुपये की शुरुआत कैसी रही?

घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार की शुरुआत भारी सुस्ती के साथ हुई और बाजार लाल निशान में आ गया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स  111.23 अंक गिरकर 77,044.39 के स्तर पर आ गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 26.85 अंकों की गिरावट के साथ 24,058.85 पर पहुंच गया। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी 21 पैसे टूटकर 94.71 के स्तर पर आ गया है। बादद में दोनों बेंचमार्क सूचकांकों ने अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई कर ली और हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।

बीएसई का बेंचमार्क 108.95 अंक बढ़कर 77,264.57 पर और निफ्टी 44.25 अंक बढ़कर 24,132.60 पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज और कोटक महिंद्रा बैंक सबसे पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं।

ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एचडीएफसी बैंक और लार्सन एंड टुब्रो विजेताओं में शामिल थे। पिछले चार कारोबारी दिनों में, बीएसई बेंचमार्क 3,323.07 अंक या 4.50 प्रतिशत बढ़ा और निफ्टी 924.1 अंक या 3.98 प्रतिशत बढ़ा। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.66 प्रतिशत गिरकर 78.23 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित रात्रिभोज के दौरान तीन महीने से अधिक समय से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस खबर का फायदा बाजार को मिला।

बाजार की चार दिन पुरानी तेजी पर अचानक ब्रेक क्यों लगा?

इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख है। अमेरिका में लगातार बनी हुई ऊंची महंगाई के कारण फेड की ओपन मार्केट कमेटी को बाजार में कड़ा संदेश देना पड़ा है। इससे इस साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं तेज हो गई हैं। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका के 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.46% हो गई और वहां के बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिली।

फेड चीफ केविन वॉर्श के इस फैसले से निवेशक क्यों हैरान हैं?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार, फेड के नए प्रमुख केविन वॉर्श का यह बयान अप्रत्याशित  था। ऐसा इसलिए है क्योंकि वॉर्श हमेशा से ब्याज दरों में कटौती के पक्षधर रहे हैं और राष्ट्रपति ट्रंप भी यही चाहते थे। लेकिन ‘डॉट प्लॉट’ के अनुमानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि महंगाई को काबू करने के लिए फेड के पास कोई विकल्प नहीं है और उसे संभवतः अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

क्या इस गिरावट के बीच निवेशकों के लिए कोई राहत की खबर है?

हां, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार धीरे-धीरे अपनी ऊपर की चाल बनाए रख सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव का कम होना और पश्चिम एशिया में संभावित शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदें हैं। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से महंगाई का दबाव कम होने और देश के बाहरी क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद बंधी है।

एचडीएफसी बैंक ने आरबीआई की स्पेशल स्कीम के तहत कौन सा रिकॉर्ड बनाया है?

इस पूरे बाजार घटनाक्रम के बीच दिग्गज प्राइवेट लेंडर एचडीएफसी बैंक ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बैंक ने रिजर्व बैंक की ‘1.5% फिक्स्ड-रेट स्वैप फैसिलिटी’ का इस्तेमाल करते हुए 750 मिलियन डॉलर की एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ईसीबी) जुटाई है। एचडीएफसी बैंक इस विशेष सुविधा का लाभ उठाने वाला देश का पहला बैंक बन गया है। इस 5-वर्षीय विदेशी बॉन्ड को बैंक की ‘गिफ्ट सिटी’ शाखा के जरिए जारी किया गया है, जो फरवरी 2024 के बाद बैंक का पहला विदेशी बॉन्ड सेल है।

वैश्विक बाजारों का क्या हाल रहा?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजारों में मिले-जुले संकेत देखने को मिले हैं। जापान के टॉपिक्स में 1.4% और अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 0.9% की तेजी दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, हांगकांग के हैंग सेंग में 1.4%, यूरोप के यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में 0.5% और ऑस्ट्रेलिया के एसएंडपी/एएसएक्स 200 में 0.4% की गिरावट रही, जबकि शंघाई कंपोजिट में लगभग कोई बदलाव नहीं देखा गया।



अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े रुख ने भले ही भारतीय शेयर बाजार की मौजूदा तेजी पर अस्थाई रोक लगा दी हो, लेकिन सस्ते कच्चे तेल और पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों ने बाजार को एक मजबूत बुनियाद दी है। इसी बीच एचडीएफसी बैंक का नया वित्तीय कदम भारतीय बैंकिंग सेक्टर की मजबूती को भी दर्शाता है।

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