सेंथिल मदुरै के वाडीपट्टी में अपनी दो बेटियों के साथ रहते हैं। पत्नी के खाते में 1000 रुपये आते हैं। बेटियों की पढ़ाई के लिए 1000-1000 रुपये अलग से मिलते हैं। पत्नी और बेटियां बस में मुफ्त सफर करती हैं। घर पर जो मिक्सर है, वो अन्नाद्रमुक सरकार में मिला था। हालांकि, डीएमके से मिला टीवी उनके पिताजी की मौत के पहले ही खराब हो गई थी। रजलक्ष्मी खुश हैं कि सरकार ने उनके बेटे को लैपटॉप दिया है। यह कहानी किन्हीं एक-दो परिवारों की नहीं, न ही किसी एक पार्टी के दिए मुफ्त तोहफों की है। यह राजनीति की वह परंपरा है, जो इन दिनों तमिलनाडु चुनावों में चर्चा के चरम पर है।

राज्य के पूर्व वित्त मंत्री, मदुरै से डीएमके के विधायक और उम्मीदवार पीटीआर पलानीवेल थियागराजन कहते हैं, फ्रीबीज के आसपास होती राजनीति दोगलापन है। जो पार्टी देती है, उसे यह मदद, भलाई लगता है और दूसरे को मुफ्त रेवड़ियां। जो भी दिया जा रहा है, शिक्षा हो, बच्चों के लिए मुफ्त खाना या हेल्थ, वह या तो सुरक्षा है, या फिर भविष्य के लिए इन्वेस्टमेंट। हर इन्वेस्टमेंट का फायदा मिलने में वर्षों लग जाते हैं। यही आपका फैसला है कि इसे आप फ्रीबी कहते हैं या नहीं।
डीएमके का कहना है कि उन्होंने अपने इन वादों की फेहरिस्त को बाकायदा रिसर्च करके बनाया है। जिस टीम ने डीएमके का 2026 चुनावों का घोषणा पत्र बनाया, उसकी लीडर कनिमोझी थीं। हालांकि, स्टालिन के तड़कते-भड़कते चुनावी भाषण में वादों—मुफ्त तोहफों का भरपूर जिक्र ऐसा लग रहा है, मानो वह आम बजट पढ़ रहे हों। 8वीं क्लास तक के बच्चों को सुबह का नाश्ता देने का वादा है, जो फिलहाल 5वीं तक के बच्चों को मिल रहा था। वृद्धा पेंशन को 1,500 से बढ़ाकर 2,000 कर दिया है। घरेलू महिला के लिए 1,000 रुपये की मदद अब 2,000 होगी और बच्चों की स्कॉलरशिप 1,000 से बढ़ाकर 1,500। इसके अलावा फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन जैसे सामान खरीदने के लिए 8,000 रुपये का कूपन दिया जाएगा।
- राजनीतिक एक्सपर्ट प्रो. रामू मणिवन्नन कहते हैं, अगर इतनी सहूलियतें मिलेंगी, तो लोग काम नहीं करेंगे। सरकार के लिए जरूरी है कि वह पैसों का लालच न बढ़ाए। हक अदा करें, अच्छी पढ़ाई और इलाज मुफ्त में दें। हालांकि उनका यह भी कहना है कि भाजपा बिहार जैसे गरीब राज्य में 10,000 रुपये मदद बोलकर देती है और तमिलनाडु जैसे विकसित प्रदेश में उसे मुफ्तखोरी कहती है।
- 1956 में डीएमके सीएम अन्नादुरई ने तिरुनेलवेली जिले से मिड-डे मील की शुरुआत की। इसके बाद स्कूल में बच्चों की संख्या काफी बढ़ गई। 1982 में एमजीआर बढ़ाकर इसे प्राइमरी स्कूलों तक ले गए। 1960 में डीएमके के सीएम अन्नादुरई 1 रुपये में 3.75 किलो चावल देने वाली स्कीम लेकर आए। 1989 में करुणानिधि ने मुफ्त बिजली दी। एआईएडीएमके की सीएम जयललिता ने मुफ्त में वॉशिंग मशीन और मिक्सर-ग्राइंडर बांटे। वह अम्मा कैंटीन लेकर आईं। पार्टी ने मुफ्त एलपीजी सिलिंडर भी दिए और नमक, पानी और दवाएं भी मुफ्त दीं। 2006 में करुणानिधि ने अपने चैनल कलैगनार टीवी का नाम छपा कलर टीवी बांटा।
- 2011 में जयललिता ने मुफ्त भैंस देने का वादा किया था, जिसका काफी मजाक बना। हालांकि वह दूध के व्यवसाय में मदद के लिए था। जब फ्रिज-वॉशिंग मशीन का वादा किया तो यह तर्क दिया कि गरीब बिल कैसे भरेंगे। मुफ्त कलर टीवी वाले वादे के दौरान डीएमके को 96 सीटें मिली थीं। हालांकि चीन के बने सस्ते टीवी जल्दी खराब हो गए और फिर जनता नाराज होने लगी। इसका नुकसान 2011 के चुनाव में डीएमके को हुआ।
- 2011 में अन्नाद्रमुक के पंखे, मिक्सर के वादे पर 150 प्लस सीटें मिलीं। और 2021 में महिलाओं के खाते में कैश योजना के बाद डीएमके की वापसी हुई और स्टालिन को 133 सीटें मिलीं।
- हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन फ्रीबीज पर अलग-अलग केस में टिप्पणी करते हुए यहां तक कहा कि यह लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं, करदाताओं का पैसा बर्बाद करते हैं और इससे स्वतंत्र चुनाव की भावना कमजोर होती है।
इस बार क्या हैं चुनावी वादे
डीएमके : महिलाओं को 5000 कैश, बस में मुफ्त सफर, स्कूल में नाश्ता और खाना
अन्नाद्रमुक : हर महीने कैश, अम्मा कैंटीन, मिक्सर-ग्राइंडर, फ्रिज, बस में मुफ्त सफर में पुरुष भी
टीवीके : 20 लाख तक एजुकेशन लोन, बेरोजगारों को 4000 (ग्रेजुएट को) और 2500 (डिप्लोमा वालों को)
भाजपा : कैश, प्रधानमंत्री आवास के तहत घर, मुफ्त राशन वाली स्कीम
