भारतीय शेयर बाजारों में महीनों की निराशा के बाद बाजार अब अच्छा प्रदर्शन दिख सकता है, क्योंकि बेहतर होती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, उचित मूल्यांकन, विदेशी निवेशकों के शेयर बिक्री में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की वजह से शेयर बाजार के लिए अनुकूल माहौल बन रहे हैं। पिछले कुछ महीने घरेलू शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रहे है, जहां जीडीपी और आय वृद्धि में मंदी, विदेशी पोर्टफोलिय निवेशक (एफपीआई) की लगातार निकासी और उच्च मूल्यांकन सहित पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार में कमजोरी को बढ़ाया है।
क्रूड में नरमी और अमेरिका से समझौते की उम्मीद से क्या बदलेगा?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने अमर उजाला डॉटकॉम से बातचीत में बताया, “वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में तनाव का कम होना, कच्चे तेल की कीमतों में युद्ध से पहले के स्तर पर तेज गिरावट, होर्मुज स्ट्रेट में बेहतर होता आवागमन, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति के बीच भारत और अमेरिका के व्यापार समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीद से घरेलू निवेशकों के सेंटिमेंट को बढ़ावा मिला है। हालांकि बढ़ते महंगाई के दबाव और ग्रामीण मांग में कमी के बीच मॉनसून की असमानता को लेकर चिंताएं कम नहीं हुई हैं।”