अगर आपका होम लोन चल रहा है या बैंक की एफडी में पैसा जमा होकर रखा है तो आपको आरबीआई के नए फैसले की जानकारी होनी ही चाहिए. आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद एक्स्ट्रा पैसे यानी सरप्लस लिक्विडिटी को कम करने के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपए के सरकारी बॉन्ड बेचने का फैसला किया है. ये बिक्री सितंबर में तीन चरणों में होगी.
अब सवाल ये है कि आरबीआई के इस कदम से आम जनता पर क्या फर्क पड़ने वाला है और क्या इससे होम लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी? क्या इससे एफडी पर ब्याज ज्यादा मिलेगा?
आरबीआई 1 लाख करोड़ क्यों निकाल रहा है?
दरअसल, इस समय भारतीय बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से काफी ज्यादा पैसा मौजूद है. सितंबर की शुरुआत में बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी करीब 10.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई थी. अब आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में मौजूद एक्स्ट्रा नकदी को कम करने के लिए बाजार से 1 लाख करोड़ रुपए निकाल रहा है.
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आरबीआई बाजार से पैसा कैसे खींचता है?
आरबीआई जब सरकारी बॉन्ड बेचता है तो बैंक और दूसरे निवेशक उन बॉन्ड को खरीदने के लिए पैसा देते हैं. ये पैसा बैंकिंग सिस्टम से निकलकर आरबीआई के पास चला जाता है. इस तरह बाजार में घूम रहा एक्स्ट्रा पैसा कम हो जाता है. आरबीआई ने 1 लाख करोड़ रुपए की बॉन्ड बिक्री को तीन हिस्सों में करने का फैसला किया है. पहली बिक्री 17 सितंबर को 50000 करोड़ रुपए की होगी, जबकि 21 और 28 सितंबर को 25000- 25000 करोड़ रुपए की बिक्री की जाएगी.
होम लोन पर क्या असर पड़ेगा?
जब आरबीआई बाजार से पैसा खींचता है तो इसका होम लोन पर असर पड़ता ही है. बैंक के पास नकदी की कमी हो जाती है इसलिए वो अपनी लागत की भरपाई के लिए ब्याज बढ़ा देते हैं. इससे ईएमआई भी महंगी हो जाती है. इतना ही नहीं, कुछ बैंक तो लोन चुकाने का समय भी बढ़ा देते हैं.
एफडी पर क्या पड़ेगा असर?
एफडी में पैसा रखने वालों पर भी इसका असर पड़ता है. चूंकि बाजार में पैसे की कमी होने लगती है, इसलिए बैंकों को अपनी लोन देने की जरूरतों को पूरा करने के लिए आम जनता से फंड जुटाना पड़ता है.
लेकिन अगर सिस्टम में एक्स्ट्रा पैसा कम होता है और बैंक को फंड की जरूरत पड़ती है तो वो ज्यादा डिपॉजिट करते हैं और इसके लिए एफडी के ब्याज दर बढ़ जाते हैं. यानी लंबे समय में आरबीआई की नकदी की कमी एफडी रेट्स बढ़ा सकती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि सारे बैंक तुरंत एफडी पर ब्याज बढ़ा देंगे.
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