राजस्थान के बूंदी जिले में एक आठ वर्षीय बच्चे की सतर्कता और साहस ने बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुरीति को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। कक्षा 5 में पढ़ने वाले आठ वर्षीय बच्चे ने समय रहते चाइल्डलाइन 1098 पर कॉल कर अपनी सहपाठी की शादी रुकवा दी, जो कि अक्षय तृतीया की रात आयोजित होने वाली थी।


‘मेरी दोस्त की शादी रोक दीजिए’
बताया गया कि बच्चे ने चाइल्डलाइन अधिकारियों से भावुक अपील करते हुए कहा “भैया/दीदी मेरी दोस्त की शादी रोक दीजिए। वह बहुत छोटी है, हम साथ पढ़ते और खेलते हैं। वह शादी नहीं करना चाहती, बल्कि आगे पढ़ाई करना चाहती है।”
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची टीम
बच्चे की सूचना मिलते ही जिला चाइल्डलाइन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। जांच के दौरान पता चला कि आठ वर्षीय बच्ची की शादी की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान वहां एक और 16 वर्षीय किशोरी की शादी की तैयारी भी सामने आई। पुलिस और प्रशासन की मदद से दोनों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकालकर बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया। समिति ने दोनों को अस्थायी रूप से शेल्टर होम भेजने के निर्देश दिए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रखा जा सके।
कानून के तहत बाल विवाह पूरी तरह प्रतिबंधित
भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (PCMA) के तहत बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद राजस्थान के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में अक्षय तृतीया (आखा तीज) जैसे अवसरों पर अभी भी बाल विवाह के मामले सामने आते रहते हैं, जिन्हें रोकने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी और सख्ती
जिला प्रशासन ने बाल विवाह की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष निगरानी तंत्र सक्रिय किया है। जिला मुख्यालय पर 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर शुरू किए गए हैं। साथ ही आशा कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को संदिग्ध मामलों की तुरंत सूचना देने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। हाल ही में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा कई मामलों में रोक लगाने के आदेश जारी किए गए, जिससे समय रहते नाबालिग लड़कियों की शादी रोकी जा सकी।
ये भी पढ़ें- ‘ओछी राजनीति ने महिलाओं के सपनों पर पानी फेरा’; महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भड़के सीएम भजनलाल
बच्चे की हिम्मत बनी समाज के लिए प्रेरणा
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने बच्चे के इस साहसिक कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह घटना जागरूकता अभियानों की सफलता का उदाहरण है। बच्चे की समझदारी और सही समय पर उठाए गए कदम ने न केवल उसकी सहपाठी का भविष्य सुरक्षित किया, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक संदेश दिया है कि जागरूकता से बड़ी कुरीतियों को रोका जा सकता है।
