लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि मामले में गुरुवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। एक दिन पहले ही राहुल गांधी की तरफ से मानहानि के प्रकरण में अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट में आवेदन पेश किया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय सिंह ने उनके लिखित खेदनामा को स्वीकार करते हुए प्रकरण को समाप्त करने के लिए सहमति व्यक्त की। हाईकोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे मानहानि मामले को निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं।


यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में दायर मानहानि परिवाद से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 29 अक्टूबर 2018 में झाबुआ में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स लीक प्रकरण का उल्लेख करते हुए शिकायतकर्ता का नाम लिया था, जिससे उनकी और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
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परिवाद पर सुनवाई करते हुए भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट ने राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी किए थे। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राहत की मांग की थी। हाईकोर्ट ने पूर्व में सुनवाई के दौरान अधीनस्थ न्यायालय का रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। मंगलवार को हुई सुनवाई में राहुल गांधी की ओर से एमपी-एमएलए कोर्ट का रिकॉर्ड हाईकोर्ट के समक्ष पेश किया गया। साथ ही 25 जून को निर्धारित सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने के लिए आवेदन भी दाखिल किया गया था। इस आवेदन पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से प्रस्तुत आवेदन में कहा गया कि उनका बयान शिकायतकर्ता के संदर्भ में नहीं था। साथ ही बयान को लेकर खेद भी व्यक्त किया गया। आवेदन में कहा गया था कि तथाकथित पनामा पेपर्स मामले में गलती से शिकायतकर्ता का नाम ले लिया था। इसके लिए उन्होंने अगले दिन सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया था। उनका इरादा पनामा पेपर्स मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र के नाम का जिक्र करना था। याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने भोपाल एमपी-एमएलए कोर्ट में लंबित मानहानि के प्रकरण को समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की। एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए उक्त आदेश जारी किए। शिकायतकर्ता की तरफ से अधिवक्ता संकल्प कोचर ने पैरवी की।
