बिहार सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन गया की यह तस्वीर उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। गया-बोधगया मुख्य मार्ग पर स्थित प्राथमिक विद्यालय बक्सु विगहा पिछले 28 वर्षों से मंदिर परिसर में संचालित हो रहा है। यहां बच्चे पेड़ के नीचे और मंदिर के फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जबकि इसी सड़क से रोज अधिकारी और मंत्री बोधगया आते-जाते हैं।
28 वर्षों से मंदिर परिसर में चल रहा विद्यालय
गया जिले के गया-बोधगया रोड पर आईटीआई के समीप स्थित प्राथमिक विद्यालय बक्सु विगहा वर्ष 1998 से अपने भवन का इंतजार कर रहा है। लगभग 28 वर्षों से यह विद्यालय गांव के देवी मंदिर परिसर में संचालित हो रहा है। स्कूल के पास न अपना भवन है और न ही पढ़ाई के लिए पक्के कमरे। बच्चे मंदिर परिसर में लगे पेड़ की छांव और खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
गर्मी, बरसात और ठंड… हर मौसम में खुले आसमान का सहारा
विद्यालय के बच्चों के लिए मौसम कोई मायने नहीं रखता। भीषण गर्मी हो, बारिश हो या कड़ाके की ठंड, पढ़ाई मंदिर परिसर में ही होती है। बारिश के दिनों में पढ़ाई बाधित हो जाती है, जबकि गर्मी में बच्चे तेज धूप और उमस के बीच पढ़ने को विवश रहते हैं।
न शौचालय, न पेयजल की व्यवस्था
विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। यहां शौचालय नहीं है। यदि किसी बच्चे को शौचालय जाना पड़ता है तो उसे अपने घर जाना पड़ता है। पीने के पानी के लिए बच्चे मंदिर परिसर में लगे चापाकल पर निर्भर हैं। शिक्षकों को भी सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करानी पड़ती है।
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मुख्य सड़क किनारे पढ़ाई, हर पल हादसे का डर
विद्यालय गया-बोधगया मुख्य सड़क के बिल्कुल किनारे स्थित है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों के बीच बच्चों की सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता है। सड़क से उड़ने वाली धूल और मिट्टी पूरे दिन बच्चों और शिक्षकों को परेशान करती है। वहीं, शिक्षकों को पढ़ाई के साथ-साथ इस बात का भी लगातार ध्यान रखना पड़ता है कि कोई बच्चा सड़क की ओर न चला जाए।
रोज गुजरते हैं अधिकारी और मंत्री, फिर भी नहीं पड़ी नजर
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस सड़क से प्रतिदिन जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी गुजरते हैं और बोधगया जाने के लिए बिहार सरकार के मंत्री भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं, उसी सड़क किनारे यह विद्यालय वर्षों से बदहाली में चल रहा है। इसके बावजूद अब तक न विद्यालय भवन का निर्माण हो सका और न ही बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकीं।
शिक्षा के दावों पर उठ रहे सवाल
एक ओर सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक विद्यालयों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर 28 वर्षों से मंदिर परिसर में संचालित यह विद्यालय सरकारी दावों की जमीनी हकीकत सामने रखता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार विद्यालय भवन की मांग उठाई गई, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
स्थानीय लोगों की मांग
ग्रामीणों और अभिभावकों ने सरकार एवं जिला प्रशासन से प्राथमिक विद्यालय बक्सु विगहा के लिए शीघ्र स्थायी भवन, शौचालय, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बच्चों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिल सके।
111 बच्चों का भविष्य मंदिर के भरोसे
प्राचार्य सह प्रधान सचिव मुकेश कुमार सिंह बताते हैं कि वर्ष 1998 से यह विद्यालय मंदिर परिसर में ही संचालित हो रहा है। पहले के प्रभारियों ने भी विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी दी थी और हमने भी विद्यालय की स्थिति से संबंधित लिखित सूचना दी है। बारिश होने पर काफी परेशानी होती है। कुछ बच्चों को मंदिर के अंदर और कुछ को बाहर बैठाकर पढ़ाना पड़ता है।
विद्यालय इसी तरह चल रहा है। विद्यालय में मेरे अलावा चार शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। यहां शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। बच्चों के साथ-साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी शौचालय के लिए आसपास के घरों पर निर्भर रहना पड़ता है। विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई होती है। कुल 111 बच्चों का नामांकन है, जबकि प्रतिदिन 75 से 85 बच्चे उपस्थित रहते हैं। बच्चों का मध्याह्न भोजन भी मंदिर परिसर में ही कराया जाता है। आगे क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। जानकारी मिली है कि भवन के लिए फंड स्वीकृत हुआ है और हम लगातार प्रयासरत हैं।
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व्यवस्था सुधरे, तभी सुधरेगी पढ़ाई
शिक्षिका शोभा ने बताया कि मंदिर परिसर में एक ही स्थान पर कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाना बेहद कठिन है। सड़क किनारे होने से वाहनों का शोर पढ़ाई में बाधा बनता है। बारिश में फर्श भीग जाता है, जिससे बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि शौचालय नहीं होने से शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी परेशानी होती है। उनका कहना है कि पढ़ाई में सुधार से पहले स्कूल के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में सुधार जरूरी है।
बच्चों की जुबानी स्कूल की परेशानी
विद्यालय के बच्चों ने बताया कि मंदिर परिसर में पढ़ाई के दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बारिश होने पर पढ़ाई बाधित हो जाती है और कई बार घर लौटना पड़ता है। शौचालय नहीं होने से बच्चों को घर या खुले में जाना पड़ता है। धूप, चींटियों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच पढ़ाई करना उनकी रोज की मजबूरी बन गई है।
