भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई थी. इसे प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अच्छा करार दिया है. उन्होंने ANI की तरफ से पूछे गए एक सवाल पर कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी उनके दोस्त हैं और दोनों के बीच काफी सकारात्मक चर्चा हुई थी. यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में युद्ध जारी है और इसे रोकने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं.
मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को दोनों नेताओं ने फोन पर बात की थी. इस दौरान भारत और अमेरिका के आपसी संबंधों की समीक्षा की गई और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दी. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में अच्छी प्रगति हुई है और आने वाले समय में इस साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर खास बातचीत
इस बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई. खासतौर पर समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों नेताओं ने चिंता जताई. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) जैसे अहम समुद्री रास्ते खुले और सुरक्षित रहने चाहिए, क्योंकि यह रास्ता वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है. इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी जानकारी दी कि इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्ध विराम पर सहमति बनी है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच कई हफ्तों से लड़ाई जारी है. इस युद्ध में लेबनान को काफी नुकसान हुआ है और करीब 2,200 लोगों की जान जा चुकी है.
#WATCH | Responding to ANI’s question on his conversation with PM Narendra Modi, US President Donald Trump says, “I had a very good talk with him and he’s a friend of mine from India and he’s doing great. We had a very good conversation”
(Source: US Network Pool Via Reuters) pic.twitter.com/W9vBuSzHlU
— ANI (@ANI) April 16, 2026
हिज़्बुल्लाह का बयान
लेबनान में सक्रिय हिज़्बुल्लाह ने साफ कहा है कि युद्ध विराम पूरे लेबनान में लागू होना चाहिए और इसमें इजरायल को किसी तरह की सैन्य छूट नहीं मिलनी चाहिए. उधर, पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने भी ईरान का दौरा किया और वहां के अधिकारियों से मुलाकात की. इस मुलाकात का मकसद पश्चिम एशिया में तनाव को कम करने और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत को फिर से शुरू कराने की कोशिश करार दी गई है.
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