केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल रविवार से कनाडा के तीन दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इस दौरे से भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) पर बातचीत को गति मिलेगी और दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

भारत और कनाडा के बीच ऊर्जा सहयोग में नागरिक परमाणु सहयोग भी एक अहम क्षेत्र बनकर उभरा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब मार्क कार्नी सरकार के नेतृत्व में दोनों देश वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं।
भारत और कनाडा के बीच कृषि, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग की संभावनाएं हैं, जिससे व्यापार और निवेश में बड़ा इजाफा हो सकता है।
कनाडा के साथ मुक्त व्यापार समझौता होने से भारत को ऊर्जा उत्पादों और उर्वरकों जैसे रणनीतिक उत्पादों के आयात स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण इन उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने कनाडा से सबसे ज्यादा पीली मटर और मसूर दाल का आयात किया। वहीं, भारतीय उद्योगों को दवा उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, लोहा एवं इस्पात उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल और इलेक्ट्रिकल उपकरणों के निर्यात में नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित व्यापार समझौते से भारतीय निर्यातकों, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। इससे बाजार तक पहुंच आसान होगी, व्यापार प्रक्रियाएं सरल होंगी और तकनीक व नवाचार आधारित क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा।
आर्थिक मजबूती पर जोर
बदलते वैश्विक व्यापार माहौल और आपूर्ति श्रृंखला में हो रहे बदलावों के बीच भारत और कनाडा के मजबूत व्यापारिक संबंध दोनों देशों की आर्थिक मजबूती और विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं।
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वैश्विक चुनौतियों के बीच सहयोग
हाल के समय में भू-राजनीतिक संघर्ष, टैरिफ से जुड़ी बाधाएं और बदलते अंतरराष्ट्रीय व्यापार समीकरणों के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे में भारत और कनाडा के बीच बढ़ता सहयोग व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा बढ़ाने में मददगार माना जा रहा है।
सीईपीए वार्ता का अगला दौर
इस महीने की शुरुआत में दोनों देशों के बीच प्रस्तावित सीईपीए के दूसरे दौर की वार्ता हुई। इसमें वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, बौद्धिक संपदा, मूल नियम, स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों तथा तकनीकी व्यापार बाधाओं सहित कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
