Petrol Smuggling: ईरान- यूएस के बीच चल रहे युद्ध का असर अन्य देशों में भी देखने को मिल रहा है. भारत में जहां पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ी हैं , तो वहीं पड़ोसी देश नेपाल में भी इसकी कीमतों में इजाफा हुआ है. लेकिन पड़ोसी देश होने के बावजूद इन दोनों देशों में पेट्रोल की कीमतों में जमीन- आसमान का फर्क है. ये फर्क इतना ज्यादा है कि दोनों देशों के बीच तस्करों की संख्या बढ़ने लगी है. अब सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए तैयारी कर ली है.
पेट्रोल की हो रही तस्करी
इस ग्लोबल संकट के दौर में नेपाल में पेट्रोल की कीमत उत्तर प्रदेश की तुलना में करीब 60 रुपये (प्रति लीटर के हिसाब से) ज्यादा है. इस भारी मुनाफे का फायदा उठाने के लिए लोग कम कीमत में पेट्रोल खरीदकर नेपाल में तस्करी कर रहे हैं. इसे रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन, ऑइल मार्केटिंग कंपनियां और सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने मिलकर बॉर्डर पर कड़ी निगरानी रखने की ठानी है.
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अब सरकार की नजर नेपाल की बॉर्डर पर रहने वाली है, यहां तीन स्तरीय निगरानी प्रणाली तैयार की गई है जो हर आने- जाने वाली की अच्छी तरह से तलाशी लेगी. इस तगड़े चेकिंग सिस्टम की मदद से भारत से सस्ता तेल ले जाकर तस्करी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
ये 8 जिले निगरानी में
उत्तर प्रदेश और नेपाल के बीच करीब 579 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है. यहां से आना- जाना काफी आसान है, न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल के इस खेल को देखते हुए यूपी के 8 सीमावर्ती जिलों में चौतरफा निगरानी बढ़ा दी गई है. इन जिलों में बहराइच, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी, गोंडा और बस्ती शामिल है.
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इस तरह रखी जा रही निगरानी
- पेट्रोल पंपों पर डिजिटल और मैनुअल निगरानी बढ़ा दी गई है, जिससे बार-बार कम गैप में तेल भरवाने वाले वाहनों की पहचान कर उन्हें जरूरत के हिसाब से ही ईंधन दिया जा रहा है.
- जिला प्रशासन पेट्रोल पंपों पर औचक निरीक्षण कर थोक ईंधन खरीद और नेपाल सीमा की ओर बार-बार जाने वाले वाहनों पर कड़ी नजर रख रहा है.
- अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात शसस्त्र सीमा बल (SSB) ने संवेदनशील रास्तों और सीमा से लगे गांवों में गश्त व खुफिया निगरानी कड़ी कर दी है.
इस तरह से सरकार पूरी तरह निगरानी रख रही है और तेल की तस्करी को रोकने की कवायद कर रही है.

