ओंकारेश्वर के नर्मदा के दक्षिणी तट पर विराजित भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन, पूजन एवं नर्मदा स्नान के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुरूप मंदिर में स्थापित दान पेटियों में दान करते हैं, लेकिन पिछले लगभग एक वर्ष से इन दान पेटियों में एकत्र हो रही राशि के संबंध में सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने से पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

मंदिर का संरक्षण एवं रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया जाता है, जबकि देवी अहिल्याबाई होलकर की परंपरा के अनुसार आज भी भगवान की तीनों समय की पूजा, आरती एवं धार्मिक व्यवस्थाओं का निर्वहन किया जा रहा है।
एक वर्ष पूर्व ममलेश्वर मंदिर में दान पेटियां लगवाई गईं थी
लगभग एक वर्ष पूर्व खंडवा जिला प्रशासन के निर्देश पर तत्कालीन पुनासा एसडीएम शिवम प्रजापति के कार्यकाल में ममलेश्वर मंदिर में दान पेटियां स्थापित कर मंदिर प्रबंधन समिति का गठन किया गया था। उद्देश्य यह बताया गया था कि श्रद्धालुओं से प्राप्त दान राशि का उपयोग मंदिर परिसर के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा।
कितना चढ़ावा आता इसकी जानकारी नहीं
अब मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य, संत समाज तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने दान राशि के आय-व्यय का सार्वजनिक विवरण जारी करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि प्रत्येक माह दान पेटियां खोली जाती हैं, लेकिन अब तक यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई कि कुल कितनी राशि प्राप्त हुई, वह किस बैंक खाते में जमा की गई और उसका उपयोग किन कार्यों में किया गया।धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित प्रत्येक रुपये का पारदर्शी लेखा-जोखा समय-समय पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा किसी प्रकार की भ्रांति या विवाद की स्थिति भी उत्पन्न नहीं होगी।

