दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को हरा दिया हैं। कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को छह हजार से ज्यादा मतों से हराया। इस पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा भूमिका पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की रही। नरोत्तम मिश्रा दतिया से चुनाव लड़ना चाह रहे थे, उन्होंने नामांकन पत्र भी ले लिया था, लेकिन पार्टी की तरफ से ऐनवक्त पर आशुतोष तिवारी को टिकट दे दिया गया। अब उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद मीडिया से बातचीत में नरोत्तम मिश्रा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी राज्यसभा या लोकसभा जाने की इच्छा नहीं जताई। उन्होंने सिर्फ विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने किसी अन्य उम्मीदवार को मौका दिया।
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30 साल विधायक और 15 साल मंत्री रहा
डॉ. मिश्रा ने कहा, कि मैं 30 साल विधायक रहा हूं और पार्टी ने मुझे 15 साल मंत्री रहने का अवसर दिया। मेरी राजनीति का अब पटाक्षेप हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि अब उनकी किसी पद की कोई इच्छा नहीं है। उनकी केवल यही अपेक्षा है कि पार्टी उन्हें एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में काम करने का अवसर देती रहे, जैसा कि पिछले ढाई वर्षों से देती आ रही है।
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नरोत्तम के मतदान केंद्र पर भी भाजपा हारी
दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना में कांग्रेस लगातार मजबूत बढ़त बनाए हुए थी। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मतदान केंद्र की रही, जिस बूथ को भाजपा का मजबूत माना जाता था, वहां भी कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी से अधिक वोट मिले। बूथ क्रमांक 121 पर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 291 वोट, जबकि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 264 वोट मिले। इस तरह कांग्रेस ने इस बूथ पर 27 वोटों की बढ़त दर्ज की। राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ एक बूथ का परिणाम नहीं, बल्कि बदलते स्थानीय राजनीतिक माहौल का संकेत मान रहे हैं। डॉ. नरोत्तम मिश्रा लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं। ऐसे में उनके बूथ पर भी भाजपा का पीछे रहना पार्टी के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।
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प्रत्याशी बदलने पर उठे सवाल
बता दें, दतिया चुनाव में हार को लेकर पार्टी के टिकट बदलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल, नरोत्तम मिश्रा के टिकट काटने के बाद उनके समर्थक नाराज हो गए थे। इसको लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए और हाईवे तक जाम किया गया। लेकिन वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद नरोत्तम मिश्रा कार्यकर्ताओं को समझाने के साथ ही खुद भी आशुतोष तिवार के चुनाव प्रचार में उतरे थे, लेकिन पार्टी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।


