उमरिया से लगे अनुपपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। पुष्पराजगढ़ ब्लॉक के गिंजरी गांव स्थित शनि मंदिर के पास श्रद्धालुओं से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में 4 ग्रामीणों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि लगभग 41 लोग घायल हो गए। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पड़मनिया और आसपास के करीब 50 ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर बिजौरा में आयोजित पूजन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। यात्रा के दौरान अनूपपुर सीमा से लगे तिवनी गांव स्थित सनी धाम के पास अचानक ट्रैक्टर-ट्रॉली का संतुलन बिगड़ गया और वाहन सड़क किनारे पलट गया।
हादसा इतना भयावह था कि ट्रॉली में बैठे कई लोग उसके नीचे दब गए। मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े और घायलों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। सूचना मिलते ही पाली एसडीएम, पुलिस प्रशासन और राजस्व अमला मौके पर पहुंच गया। स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया।
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पुलिस मामले की जांच में जुटी
घायलों को एम्बुलेंस और अन्य निजी वाहनों की सहायता से पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार जारी है। गंभीर रूप से घायल कई लोगों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। इस दर्दनाक हादसे में जिन ग्रामीणों की मौत हुई है, उनमें घनश्याम गोड़ निवासी पड़मनिया, सहबल बैगा निवासी गिंजरी, वीर सिंह पिता माधव सिंह निवासी गिंजरी तथा भूपति सिंह पिता भगीरथ सिंह निवासी पड़वानिया शामिल हैं। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के गांवों में मातम छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
क्या बोले ग्रामीण?
वहीं इस हादसे ने पाली अस्पताल की बदहाली की भी पोल खोल दी। बड़ी संख्या में घायल पहुंचने के बाद अस्पताल में पर्याप्त स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं थे। कई घायलों को जमीन पर लिटाकर इलाज करना पड़ा। अस्पताल परिसर में अव्यवस्था का माहौल दिखाई दिया। गंभीर हादसे के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आने से लोगों में नाराजगी भी देखी गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होते तो घायलों को ज्यादा राहत मिल सकती थी। हादसे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।


