बांग्लादेश की अवामी लीग पार्टी ने सोमवार को आरोप लगाया कि पिछली मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के समय की लापरवाही और नीति की नाकामियों की वजह से देश में खसरे का प्रकोप बढ़ गया है। इसकी वजह से 500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। पार्टी ने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की हालिया बातों से यह पक्का हो गया है कि यह संकट कोई हादसा नहीं था, बल्कि यूनुस की जानबूझकर की गई लापरवाही का नतीजा था।
पूर्व की यूनुस सरकार को यूएन की एजेंसी ने दी थी चेतावनी
यूएन एजेंसी ने कहा कि उसने यूनुस की लीडरशिप वाली पिछली अंतरिम सरकार को बार-बार लिखकर और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मीटिंग के जरिए वैक्सीन की कमी के बारे में चेतावनी दी थी उन्हें बताया गया था कि एक बड़ा स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है। यह बात सामने आई है कि कई वर्षों तक सरकार ने यूनिसेफ के जरिए डायरेक्ट प्रोक्योरमेंट तरीके से वैक्सीन खरीदी, लेकिन पिछले साल अंतरिम सरकार ने यूनिसेफ और ओपन टेंडर प्रक्रिया के बीच खरीद को बांटने का फैसला किया, जिससे वैक्सीन खरीदने में देरी हुई।
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यूनिसेफ ने इस कदम का कड़ा विरोध किया और चेतावनी दी कि इससे टीकाकरण सिस्टम में रुकावट आ सकती है और बीमारी फैल सकती है। ‘साइंस एडवाइजर’ ने बांग्लादेश में एजेंसी की प्रतिनिधि राणा फ्लावर्स के हवाले से कहा, यह बहुत निराशाजनक था। इसमें कहा गया, ‘उन चेतावनियों के बावजूद यूनुस सरकार ने उन्हें नजरअंदाज किया। ब्यूरोक्रेटिक दिक्कतों की वजह से टेंडर प्रोसेस रुक गया, वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो गया और नियमित टीकाकरण कार्यक्रम ठप हो गए।’
वैक्सीन और सिरिंज की खरीद में गबन के आरोप- अवामी लीग
मीडिया रिपोर्ट्स और बांग्लादेश भ्रष्टाचार विरोधी आयोग की शिकायतों का हवाला देते हुए अवामी लीग ने कहा कि वैक्सीन और सिरिंज की खरीद में ‘गबन और गड़बड़ियों’ के आरोप भी सामने आए हैं। इस बात पर जोर दिया गया कि यह सिर्फ नाकाबिलियत नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा जुर्म है।
अवामी लीग ने आगे कहा कि आज नेशनल पार्लियामेंट में बैठे कई सांसद वे हैं जिन्होंने 1971 के बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के दौरान पाकिस्तान का साथ दिया था और बांग्लादेशी बंगालियों की हत्या में हिस्सा लिया था। इसमें यह भी कहा गया कि इन सदस्यों का पहला मकसद पाकिस्तान के हितों की रक्षा करना है, बांग्लादेश के लोगों की सुरक्षा और भलाई नहीं। अवामी लीग के अनुसार, वैक्सीन संकट के साथ-साथ, यूनुस सरकार ने सत्ता में अपने आखिरी दिनों में अमेरिका के साथ पारस्परिक व्यापार समझौता’ (एआरटी) नाम का एक ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया।
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पार्टी ने दावा किया कि समझौते की समीक्षा से पता चला कि इसे बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों की कीमत पर साइन किया गया था, लेकिन इसकी टाइमिंग और भी संदेह वाली है। दरअसल, इसे इस साल फरवरी में होने वाले चुनाव से ठीक तीन दिन पहले साइन किया गया था। इसलिए जिस समय में इस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया, उसने डील के पीछे के मकसद को लेकर संदेह पैदा कर दिया। अवामी लीग ने कहा कि यूनिसेफ की चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए यूनुस ने जानबूझकर बच्चों को मौत की ओर धकेला और अमेरिका के साथ एक समझौते के जरिए देश की आजादी और संप्रभुता को कुर्बान कर दिया।
-इनपुट आईएएनएस


