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अलीगंज सेक्टर डी में सोमवार को हुए अग्निकांड में जलने वाले हैक्सार स्टूडियो की बड़ी खामियां सामने आई हैं। स्टूडियो की छत पर तारों का मकड़ जाल बना हुआ था। इतना ही नहीं स्टूडियो में बड़ी हो छोटी फॉल्ट संचालक उसे खुद दुरस्त कर देते थे।
घटनास्थल पर मंगलवार को पहुंचे पूर्व छात्र विश्वनाथ ने बताया कि जिस तल पर स्टूडियो बना हुआ था वहां पहले लाइब्रेरी थी, जो करीब डेढ़ साल पहले बंद हो गई थी। वह करीब चार साल से लाइब्रेरी जा रहे थे। उस दौरान लाइब्रेरी की पूरी छत पर तारों का जाल बिछा हुआ था। इस छिपाने के लिए लाइब्रेरी संचालक ने एक आर्टिफिशियल छत बनाई गई थी। यह थर्माकोल और फाइबर से बनी हुई थी। अगर कोई समस्या होती भी थी तो वह खुद ही सही कर लेते थे।

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– फोटो : amar ujala
लाइब्रेरी की जगह स्टूडियो खुला मगर खतरा रहा बरकरार
करीब डेढ साल पहले लाइब्रेरी बंद हो गई। उसकी जगह पर हैक्सार स्टूडियो खुल गया। मगर, खतरा बरकरार है। उसके संचालक ने भी लापरवाही जारी रखी। आरोपी संचालक भी चाहे बड़ी हो या छोटी फाल्ट कभी भी इलेक्ट्रीशियन को नहीं बुलाता था। वह खुद ही उसे सही कर लेता था। इसी कारण जब सोमवार को आग लगी तो 15 बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

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– फोटो : amar ujala
तारों, थर्माकोल और फाइबर इन तीनों चीजों ने आग में घी डालने जैसा काम किया था। इन्हीं तीनों के जलने से दमघोंटू धुआं निकला था। अंधेरा और काले धुएं के कारण लोगों को कुछ नहीं दिखा। वहीं थंब इंप्रेशन गेट के काम नहीं करने से लोग बाहर नहीं निकल सके थे।

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– फोटो : amar ujala
केजीएमयू ट्रॉमा में एसआईटी एक घंटे तक डटी रही
अलीगंज हादसे की जांच के लिए गठित एसआईटी की टीम मंगलवार को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंची। टीम ने करीब एक घंटे तक ट्रॉमा सेंटर में रहकर अधिकारियों और डॉक्टरों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। इस दौरान ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह समेत अन्य अधिकारियों से बातचीत कर हादसे के बाद घायलों के पहुंचने और इलाज की प्रक्रिया को समझा गया। घायलों व डॉक्टरों से अहम सुराग जुटाए। एसआईटी ने अधिकारियों से पूछा कि घटना के बाद मरीज किस हालत में ट्रॉमा सेंटर लाए गए थे। घायलों के शरीर पर किस तरह की चोटें थीं। उन्हें किस स्तर की चिकित्सकीय जरूरत थी। इसके साथ ही हादसे में मृत लोगों के शव किस स्थिति में ट्रॉमा सेंटर लाए गए थे? इसकी भी जानकारी ली गई। टीम ने शवों पर चोट, जलने या अन्य किसी तरह के निशान से जुड़े तथ्यों को भी जांच के दायरे में रखा।

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– फोटो : amar ujala
अधिकारियों ने एसआईटी को बताया कि हादसे के बाद ट्रॉमा सेंटर में घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। घटना में घायल दो लोग अभी भी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं। टीम ने इनमें से एक घायल लवप्रीत से बातचीत कर घटना के संबंध में जानकारी हासिल की। इसके बाद एसआईटी तीसरे तल पर पहुंची, जहां आईसीयू में भर्ती युवक का हाल जाना और उससे भी घटना से जुड़े बिंदुओं पर पूछताछ की। अग्निकांड की जानकारी कब हुई? बचाव के लिए क्या-क्या कदम उठाए। घटना के वक्त सेंटर में कितने लोग मौजूद रहे।
