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आम जनता को राहत, कारोबारियों पर भी नहीं पड़ेगा बोझ:upi चार्ज का क्या है पूरा गणित? सरकार ने किया साफ – Gov Clarifies No Charges On Upi Transactions For Users Mdr Limited

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अगर आपको भी यूपीआई चार्ज की चिंता सता रही है तो आपके लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दरअसल, केंद्र सरकार ने साफ-साफ कहा है कि आम उपभोक्ताओं से यूपीआई इस्तेमाल करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जाने वाला P2P यूपीआई ट्रांसफर पहले की तरह मुफ्त रहेगा।

हालांकि, भविष्य में यूपीआई के जरिए होने वाले कुछ बड़े कारोबारी लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। सरकार के मुताबिक, अगर एमडीआर लागू किया जाता है तो यह एक तय सीमा से ऊपर के चुनिंदा व्यापारी लेनदेन तक ही सीमित रहेगा और इसकी दर बेहद मामूली होगी।

क्या UPI करने पर आम लोगों को पैसे देने होंगे?

सरकार ने इस सवाल का सीधा जवाब दिया है- नहीं। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, सभी पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई लेनदेन मुफ्त बने रहेंगे। आम लोगों के बीच पैसे भेजने या प्राप्त करने पर कोई नया शुल्क नहीं लगाया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा कि छोटे और सामान्य दुकानदारों पर कोई ब्लैंकेट एमडीआर यानी हर यूपीआई भुगतान पर अनिवार्य शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि अगर भविष्य में एमडीआर लागू होता भी है तो यह केवल निर्धारित सीमा से ऊपर के सीमित व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा। इसकी दर डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले एमडीआर की तुलना में काफी कम रखी जाएगी।

फिर कानून में बदलाव क्यों किया गया?

यूपीआई शुल्क को लेकर भ्रम की शुरुआत पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में हालिया संशोधन के बाद हुई। इसके बाद ऐसी आशंकाएं सामने आने लगीं कि यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाया जा सकता है। सरकार का कहना है कि कानून में बदलाव का मकसद यूपीआई को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसके लंबे समय तक टिकाऊ, सुरक्षित और मजबूत डिजिटल पेमेंट सिस्टम के रूप में विकसित करना है।

यह प्रस्तावित बदलाव टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 का हिस्सा है। संसद से विधेयक पारित होने के बाद MDR लागू करने या नहीं करने का अंतिम फैसला NPCI की अगुवाई वाली UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी करेगी।

यूपीआई चार्ज पर क्या बदलेगा और क्या नहीं?

आम लोगों के लिए UPI मुफ्त रहेगा

P2P यूपीआई ट्रांसफर पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगेगा।

छोटे दुकानदारों पर जबरन शुल्क नहीं

सामान्य व्यापारियों पर कोई एकमुश्त या अनिवार्य MDR नहीं थोपा जाएगा।

बड़े कारोबारी भुगतान पर शुल्क की संभावना

एक तय सीमा से ऊपर के चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर MDR लगाया जा सकता है।

कार्ड से कम होगा शुल्क

सरकार के मुताबिक, संभावित MDR डेबिट या क्रेडिट कार्ड के मुकाबले काफी कम होगा।

यूपीआई की सुरक्षा पर बढ़ेगा निवेश

लेनदेन बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने और सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत भी बढ़ रही है।

जुलाई में बना रिकॉर्ड

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, जुलाई 2026 में यूपीआई के जरिए 29.9 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड 2,366 करोड़ लेनदेन हुए।

विदेशों तक पहुंचा UPI

भारतीय यूपीआई प्रणाली फिलहाल 11 देशों में काम कर रही है, जबकि कई अन्य देश भी इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।

यह भी पढ़ें: शहरी सहकारी बैंक: अमित शाह ने दिया बदलाव का मंत्र, आरबीआई ने भी बढ़ाये हाथ; कैसे मझेगी बैंकिंग की धार?

क्या किसी बाहरी दबाव में लिया गया फैसला?

सरकार ने विपक्षी पार्टियों के आरोपों को भी खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि यूपीआई से जुड़ा यह बदलाव किसी बाहरी दबाव के कारण किया जा रहा है। सरकार ने इन दावों को निराधार, भ्रामक और गलत बताया है। उसका कहना है कि लक्ष्य सब्सिडी पर निर्भरता कम करना और यूपीआई के लिए ऐसा टिकाऊ राजस्व मॉडल तैयार करना है, जिससे ज्यादा कंपनियां इस डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जुड़ सकें।

तो आखिर आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

सीधी बात यह है कि आम लोगों के लिए फिलहाल यूपीआई भुगतान मुफ्त ही रहेगा। बदलाव की गुंजाइश मुख्य रूप से बड़े कारोबारी लेनदेन में है। अगर भविष्य में एमडीआर लागू किया जाता है तो वह तय सीमा से ऊपर के चुनिंदा मर्चेंट भुगतानों पर ही होगा और दर भी कम रखी जाएगी।

यानी यूपीआई के जरिए रोजमर्रा के भुगतान करने वाले आम यूजर की जेब पर तत्काल कोई नया बोझ नहीं पड़ने वाला है। असली बदलाव यूपीआई के भविष्य के बिजनेस मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर की फंडिंग से जुड़ा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम जनता के लिए यूपीआई लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेगा और कोई शुल्क नहीं लगेगा। भविष्य में एमडीआर केवल एक निश्चित सीमा से अधिक के चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर बेहद मामूली दर से लग सकता है। यह फैसला यूपीआई के तकनीकी विकास, सुरक्षा और दीर्घकालिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

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