बीते कुछ वक्त से सियासी दलों के विधायकों-सांसदों की टूट की खबर सुर्खियों में है। पहले आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों का भाजपा में विलय हुआ। फिर पश्चिम बंगाल में टीएमसी की हार के बाद उसके विधायकों ने बगावत की। इसके बाद सांसदों ने पूर्वोत्तर की एक अनाम पार्टी में विलय का एलान कर दिया। अब शिवसेना में बगावत की खबरें हैं। दावा तो समाजवादी पार्टी के लिए भी होने लगा है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पीयूष पंत, राकेश शुक्ल और श्रीनिवास मौजूद रहे।
समीर चौगांवकर: जिस तरह से उद्धव ठाकरे की पार्टी में टूट हुई है, वो निश्चित रूप से ये उनके लिए बहुत बड़ा झटका है। 2022 की टूट के बाद उद्धव ठाकरे ने खुद को बचा लिया था। इस टूट के बाद भी मुझे लगता है कि महाराष्ट्र बाला साहेब ठाकरे को मानने वाला एक वोट बैंक है जो आगे भी उद्धव के साथ रहेगा। फिलहाल तो उद्धव के लिए बड़ी चुनौती का वक्त है। इसके बाद शरद पवार की पार्टी में टूट की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। मुझे लगता है कि ये वक्त क्षेत्रीय दलों के लिए बुरा है। अगला चुनाव उद्धव ठाकरे के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। पार्टी चलाने के लिए पैसा कहां से आएगा ये भी उद्धव को देखना होगा।
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