मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। अभियान से जुड़े अधिकारियों के बयानों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से भारत पर हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान ब्रह्मोस मिसाइलों से किए गए हमले बेहद अहम रहे। अब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के तत्कालीन सैन्य संचालन महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई के बयान से यह जानकारी सामने आई है कि पाकिस्तान की ओर से युद्धविराम की मांग की गई थी।
क्या पाकिस्तान ने दिल्ली को निशाना बनाकर मिसाइल दागी थी?
राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक नितिन गोखले के मुताबिक, 10 मई 2025 को रात करीब 1:30 से 1:45 बजे के बीच पाकिस्तान ने एक तेज रफ्तार मिसाइल दागी थी, जिसका निशाना दिल्ली बताया गया। भारतीय सेना ने इस मिसाइल को हरियाणा के सिरसा के ऊपर ही रोक दिया। सुबह सिरसा के एक खेत में इस मिसाइल का मलबा भी मिला था। रक्षा मंत्रालय ने उस समय बताया था कि पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के ठिकानों, सेना के गोला-बारूद भंडार, हवाई अड्डों और सैन्य छावनियों पर मिसाइलों, ड्रोन, रॉकेट और दूसरे लंबी दूरी के हथियारों से बड़ा हमला किया था। हालांकि, दिल्ली को निशाना बनाने की बात सार्वजनिक रूप से पहले नहीं बताई गई थी।

सिरसा में मिसाइल रोके जाने के बाद भारत ने क्या किया?
पाकिस्तान की ओर से हुए हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, सिरसा के ऊपर मिसाइल को रोका जाना भारत की अंतिम और सबसे तीखी जवाबी कार्रवाई का संकेत बना। इसके बाद भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों से हमला करने की जिम्मेदारी दी गई। भारतीय कार्रवाई में पाकिस्तान के कई हवाई अड्डों, रडार ठिकानों और कमांड एवं नियंत्रण केंद्रों को निशाना बनाया गया। शुरुआती हमलों में रफीकी, सुक्कुर, रहीम यार खान और नूर खान जैसे ठिकाने शामिल थे। इसके बाद सरगोधा, भोलारी और जैकबाबाद सहित अन्य सैन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई हुई। कुछ ही घंटों में पाकिस्तान के 11 सैन्य ठिकानों पर हमले किए जाने की बात सामने आई।
ब्रह्मोस हमलों से पाकिस्तान पर कितना दबाव पड़ा?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइलों को भारतीय जवाबी कार्रवाई का अहम हिस्सा बताया गया। भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इन मिसाइलों की तेज रफ्तार और सटीक हमला करने की क्षमता ने कार्रवाई को प्रभावी बनाया। पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों में रनवे, हैंगर और वहां खड़े विमानों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई। भारत की कार्रवाई का मकसद हमला बढ़ाते जाना नहीं, बल्कि पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश देना बताया गया कि भारत अपनी क्षमता के अनुसार उसके सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है। इसी दौरान पाकिस्तान की ओर से भारत से संपर्क करने की कोशिश शुरू होने की बात भी सामने आई।
पाकिस्तान ने युद्धविराम के लिए भारत से क्या कहा?
- लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई के मुताबिक, 10 मई की सुबह उन्हें जानकारी मिली कि पाकिस्तान के डीजीएमओ उनसे बात करना चाहते हैं। पाकिस्तान की ओर से संपर्क करने की कोशिश के बीच दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत के लिए इस्तेमाल होने वाली हॉटलाइन में कुछ तकनीकी समस्या भी आई।
- इसे ठीक करने में करीब एक घंटे का समय लगा। इसके बाद दोनों अधिकारियों के बीच करीब दोपहर 3:30 बजे बातचीत हुई। राजीव घई ने बताया कि पाकिस्तानी डीजीएमओ मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला ने बातचीत की शुरुआत की और कुछ ही देर में युद्धविराम की मांग रख दी।
- उनके मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि इतने ब्रह्मोस हमले हो चुके हैं, अब भारत को संतुष्ट होना चाहिए और लड़ाई को रोका जा सकता है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच 10 मई को शाम 5:30 बजे से शत्रुता रोकने पर सहमति बनी।

