ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच ईरानी विमान को लेकर पाकिस्तान की पोल खुल गई है. पाकिस्तान पहले ये दावा कर रहा था कि उसने ईरानी सैन्य विमान C-130 को नूरखान बेस पर पनाह नहीं थी, हालांकि अब सैटेलाइट तस्वीरों से ये बात साफ हो चुकी है कि उसने नूरखान एयरबेस पर ईरान एयर फ़ोर्स के सैन्य विमान C-130 को जगह दी थी.
रिपोर्ट के अनुसार 25 अप्रैल 2026 की सैटेलाइट तस्वीर में ईरान एयर फ़ोर्स का C-130 विमान पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर एक हैंगर के पास खड़ा दिखाई दे रहा है. यह एयरबेस रावलपिंडी के चकलाला इलाके में स्थित है. इसे पाकिस्तान एयर फ़ोर्स का चकलाला एयरबेस भी कहा जाता है. यह इलाका इस्लामाबाद-रावलपिंडी मेट्रो क्षेत्र का हिस्सा है और इस्लामाबाद के केंद्र से करीब 10 किलोमीटर दूर है.

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CBS न्यूज़ रिपोर्ट ने की पुष्टि
नई तस्वीरों को लेकर CBS न्यूज़ ने अपने रिपोर्ट में पुष्टि की है. अप्रैल में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीज़फ़ायर की घोषणा के बाद ईरान ने पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर कई विमान भेजे थे. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इनमें रिकॉनिसेंस और इंटेलिजेंस विमान भी शामिल थे. इस मामले पर अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी चिंता जताई है. उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन से कहा कि उन्हें पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है.
पाकिस्तान ने रिपोर्ट को किया था खारिज
सीनेट एप्रोप्रिएशन कमेटी की एक सुनवाई के दौरान ग्राहम ने कहा कि अगर पाकिस्तान के एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमान सुरक्षित रखे जा रहे हैं तो अमेरिका को किसी और देश को मध्यस्थ बनाने के बारे में सोचना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इसी वजह से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है. हालांकि पाकिस्तान ने पहले CBS न्यूज़ की रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया था. पाकिस्तान की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि यह रिपोर्ट गुमराह करने वाली और सनसनी फैलाने वाली है. पाकिस्तान का कहना था कि ऐसी बातें क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की कोशिशों को कमजोर करती हैं.
ईरान को कब मिले थे C-130 विमान?
ईरान को पहली बार 1970 के दशक में शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के शासन के दौरान C-130 विमान मिले थे. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद भी यह विमान ईरान एयर फ़ोर्स के पास बने रहे. अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण ईरान को नए C-130 विमान नहीं मिल सके, इसलिए उसने पुराने विमानों को मरम्मत और रखरखाव के जरिए इस्तेमाल में बनाए रखा. ईरान के C-130 विमानों पर रेगिस्तानी पीले रंग का कैमोफ़्लेज होता है, जो पाकिस्तान एयर फ़ोर्स के हल्के ग्रे रंग वाले C-130 विमानों से अलग दिखाई देता है. इसी वजह से सैटेलाइट तस्वीरों में विमान की पहचान आसान मानी जा रही है.
ईरान पहले भी भेज चुका है विमान
यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने युद्ध के समय अपने विमान पाकिस्तान भेजे हों. इससे पहले 2025 में भी ऐसी खबरें सामने आई थीं. उस समय इजरायल ने 13 जून से 24 जून 2025 के बीच ऑपरेशन राइजिंग लायन शुरू किया था. उस दौरान ईरान का एक बोइंग 747 विमान कराची एयरपोर्ट पर देखा गया था.
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