हरियाणा में अब जीवन के अंतिम चरण में इलाज से जुड़े फैसलों के लिए नई कानूनी व्यवस्था लागू होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को गरिमा के साथ मृत्यु (राइट टू डाई विद डिग्निटी) संबंधी नियम लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जिला अस्पतालों में मेडिकल बोर्ड गठित किए जाएंगे और लिविंग विल (एडवांस मेडिकल डायरेक्टिव) की व्यवस्था भी प्रभावी होगी।

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद किसी मरीज का लाइफ सपोर्ट हटाने का फैसला न तो कोई डॉक्टर अकेले ले सकेगा और न ही मरीज के परिजन। इसके लिए दो अलग-अलग मेडिकल बोर्डों की मंजूरी अनिवार्य होगी। दोनों बोर्डों की सहमति मिलने के बाद ही लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। साथ ही संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी को भी इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा।
स्वास्थ्य महानिदेशक मनीष बंसल के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है। सभी संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

