- देशभर में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में 50% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई.
- पांच दक्षिण भारतीय राज्यों में 75% गोल्ड लोन बकाया राशि मौजूद है.
- तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल में सबसे ज्यादा गोल्ड लोन.
- पर्सनल, कंज्यूमर ड्यूरेबल, वाहन, होम लोन में भी देखी गई बढ़ोतरी.
Gold Loan: गोल्ड लोन के मोर्चे पर देश के बैंकिंग सेक्टर से एक बेहद चौंकानेवाला और चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है. भारत के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में सालाना 50 परसेंट का उछाल दर्ज किया गया है. सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस कुल बकाया कर्ज का 75 परसेंट हिस्सा अकेले पांच दक्षिण भारतीय राज्यों के खाते में है.
दक्षिण भारतीय राज्य सबसे आगे
क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी CRIF हाई मार्क के डेटा के अनुसार, मार्च 2026 तक कुल 18.6 लाख करोड़ रुपये के गोल्ड लोन (बैंकों और NBFC सहित) में से पांच दक्षिणी राज्यों – तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल – में 13.94 लाख करोड़ रुपये हैं.
इसमें कहा गया है कि मार्च 2026 तक तमिलनाडु 5.96 लाख करोड़ रुपये के आउटस्टैंडिंग के साथ सबसे आगे है, आंध्र प्रदेश 3.08 लाख करोड़ रुपये, कर्नाटक 1.81 लाख करोड़ रुपये, तेलंगाना 1.60 लाख करोड़ रुपये और केरल 1.45 लाख करोड़ रुपये के आउटस्टैंडिंग के साथ क्रमश: दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें नंबर पर है. सोने की बढ़ती कीमतों, ज्यादा क्रेडिट डिमांड और सिक्योर्ड उधार लेने की पसंद की वजह से यह सेगमेंट तेजी से बढ़ा. सोने के प्रति अपने कल्चरल लगाव और मजबूत लेंडिंग नेटवर्क की वजह से दक्षिणी भारत इसका गढ़ बना हुआ है.
दूसरे राज्यों का क्या है हाल?
सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में गोल्ड लोन का बकाया सिर्फ 42,300 करोड़ रुपये है. दूसरे बड़े राज्यों के आंकड़े भी कम ही हैं — पश्चिम बंगाल में 35,000 करोड़ रुपये, राजस्थान में 41,700 करोड़ रुपये और गुजरात में 57,100 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन बकाया है. मार्च 2026 में ग्रोथ के मामले में दक्षिणी राज्य सबसे आगे रहे — कर्नाटक (10.5%), तेलंगाना (12.8%), और उसके बाद UP (11.2%).
दूसरी कैटेगरीज में कौन सबसे आगे?
CRIF High Mark की रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड लोन सेगमेंट में एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है. मार्च 2025 से मार्च 2026 के दौरान 2.5 लाख से 5 लाख रुपये के बड़े लोन सेगमेंट में डिफॉल्ट की दरें घटकर आधी रह गई हैं. यह दर्शाता है कि बड़े टिकट वाले सेगमेंट में कोलैटरल कवरेज ज्यादा मजबूत हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, पर्सनल लोन में साल-दर-साल (y-o-y) 12.9% की अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह इस बात को दिखाता है कि लोन देने के नियम सख्त होने के बावजूद, अनसिक्योर्ड रिटेल क्रेडिट की मांग लगातार बनी हुई है.
दूसरी श्रेणियों की बात करें तो, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में 20.8% की बढ़ोतरी हुई, जिसकी मुख्य वजह इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों की खरीद में हुई बढ़ोतरी थी. गाड़ियों की फाइनेंसिंग में भी लगातार तेजी देखने को मिली, जिसमें साल-दर-साल 13.9% से 15.1% के बीच बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, होम लोन में 9.4% की स्थिर बढ़ोतरी बनी रही, जिसकी मुख्य वजह आवास की मांग और प्रॉपर्टी बाजार में हो रही गतिविधियां थीं.
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