जेन-जी अपनी आधुनिक सोच और कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति के लिए काफी चर्चा में रहे हैं। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में भी इनका बड़ा रोल रहा है। पर क्या ये लोग अपनी सेहत को लेकर भी उतना ध्यान दे रहे हैं? ये सवाल इसलिए काफी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि कई अध्ययन लगातार चिंता जताते रहे हैं कि अब कम उम्र के लोगों में भी वह बीमारियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं, जो कभी 50-60 साल की उम्र में देखी जाती थीं।
इसी को लेकर हाल में सामने आई रिपोर्ट और भी चिंता बढ़ाने वाली है। इसमें कहा गया है कि पिछले एक दशक में 20 से 29 साल की महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज के मामलों में करीब 70 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
गौरतलब है कि जेनरेशन-जी (जेन-ज़ी) का मतलब उन लोगों से है जिनका जन्म 1997 और 2012 के बीच हुआ था। इस हिसाब से 2026 में उनकी उम्र लगभग 14 से 29 साल होगी। इस आयुवर्ग में डायबिटीज के मामलों में तेज उछाल काफी चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र में होने वाली टाइप-2 डायबिटीज, सामान्य उम्र में होने वाली डायबिटीज की तुलना में अधिक आक्रामक मानी जाती है। यानी बीमारी लंबे समय तक शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है जिससे कम उम्र में ही दिल की बीमारी, स्ट्रोक, आंखों की रोशनी कम होने, किडनी खराब होने और यहां तक कि हाथ-पैर काटने जैसी गंभीर नौबत भी आ सकती है।
आखिर इसका कारण है और कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हैं? आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं।


