राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में पिछले कुछ वक्त से प्रसूताओं की मौत के कई मामले सामने आए हैं। कोटा, बीकानेर, नागौर, डीडवाना, जोधपुर और अब भीलवाड़ा व बांसवाड़ा तक ऐसी घटनाएं हुई हैं। हर मामले के बाद जांच के आदेश दिए गए, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने सरकारी अस्पतालों की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाल के दिनों में कहां-कहां प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आए? इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है? इन मौतों पर अस्पतालों और सरकार का क्या कहना है? पीड़ित परिवारवालों ने क्या आरोप लगाए हैं?
सबसे ताजा मामला कहां का है?
ताजा मामला भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल स्थित मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (MCH) का है। यहां 5 जुलाई से 10 जुलाई के बीच छह दिन में पांच प्रसूताओं की मौत हो गई। मृतकों में शिमला गुर्जर, फोरी देवी, ईशा पांडे, दिव्या और संगीता जीनगर शामिल हैं। सभी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी और तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया था। भीलवाड़ा में मार्च से जुलाई के बीच नौ प्रसूताओं की जान जा चुकी है।
इसी दौरान बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में भी दो घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हो गई। 21 वर्षीय लक्ष्मी और 32 वर्षीय लीला ने पहली बार बच्चों को जन्म दिया था। प्रसव के 24 घंटे के भीतर दोनों की मौत हो गई, जबकि दोनों नवजात सुरक्षित हैं।