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Explained: ईरान के हाथ लगा न्यूक्लियर बम से भी बड़ा बम! बिना मिसाइल-रॉकेट के घुटनों पर ला देगा पूरी दुनिया?

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ईरान के पास ऐसा हथियार है जिसे चलाने के लिए न किसी मिसाइल की जरूरत है और न ही किसी परमाणु प्रोग्राम की. बस एक धमकी और दुनिया की बड़ी-बड़ी इकोनॉमी घुटनों पर आ जाएं. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से पहले डराया, फिर निशाना बनाया और आखिरकार 12 जुलाई 2026 को ‘अगले आदेश तक’ बंद कर दिया है. तो क्या ईरान ने ‘इकोनॉमिक बम’ बना लिया है जो बिना परमाणु विस्फोट के पूरी दुनिया की इकोनॉमी को तहस-नहस कर सकता है…

होर्मुज स्ट्रेट आखिर इतना खास क्यों है?

यह कोई आम समुद्री रास्ता नहीं है. होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और खुले हिंद महासागर से जोड़ता है. इसकी चौड़ाई सबसे संकरी जगह पर महज 33 किलोमीटर है. इस छोटी-सी पानी की पट्टी से गुजरने वाला तेल दुनिया की अर्थव्यवस्था की धड़कन है. U.S. एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) और कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की रिपोर्ट के मुताबिक:

होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत हर दिन गुजरता तेल
रोजाना गुजरने वाला कुल तेल करीब 2 करोड़ बैरल
दुनिया की कुल तेल खपत में हिस्सा 20%
दुनिया के समुद्री तेल व्यापार में हिस्सा 33% (एक-तिहाई)
दुनिया की कुल LNG आपूर्ति में हिस्सा 20%

इसके अलावा, दुनिया के यूरेनियम और खाद्यान्न व्यापार का एक बड़ा हिस्सा भी इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यह रास्ता बंद हो जाए, तो दुनिया भर में न सिर्फ पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे, बल्कि खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो जाएंगी.

यह ‘इकोनॉमिक बम’ है क्या चीज?

TIME मैगजीन के मुताबिक, ‘होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करना ईरान का असली न्यूक्लियर ऑप्शन है.’ इसे ‘इकोनॉमिक बम’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसकी तबाही का तरीका अनोखा है:

  • बिना गोली चलाए असर: मार्च 2026 में जब ईरान ने पहली बार होर्मुज बंद करने की धमकी दी, तब एक भी मिसाइल नहीं चली. फिर भी इंश्योरेंस कंपनियों ने तुरंत टैंकरों को दिया जाने वाला बीमा कवर वापस ले लिया. नतीजतन, टैंकरों की आवाजाही 70% तक गिर गई और ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत चार साल में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई.
  • परमाणु बम से सस्ता और तेज: परमाणु बम बनाने में दशकों लग जाते हैं और अरबों डॉलर का खर्च आता है. ईरान को सिर्फ अपनी नौसेना और मिसाइलों के दम पर होर्मुज को बंद करने की धमकी भर देनी होती है और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल जाती है.
  • खुद को सहने लायक नुकसान: यह एक तरह का ‘सुसाइड बम’ भी है क्योंकि होर्मुज बंद होने पर ईरान खुद भी अपना तेल नहीं बेच पाता. ईरान का अनुमान है कि दूसरे देशों को इससे जो चोट पहुंचेगी, वह उसके अपने नुकसान से कहीं ज्यादा भारी है. इसलिए वह यह जोखिम उठाने को तैयार है.

इकोनॉमिक बम की चपेट में कौन-कौन आएगा?

विदेश मामलों के जानकार और JNU के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. ए. के. पाशा के मुताबिक, होर्मुज बंद होने की मार सब पर पड़ेगी, लेकिन एशियाई देशों पर इसका असर किसी आर्थिक भूचाल से कम नहीं होगा. एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी के तेल पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं:

1. चीन को सबसे बड़ा झटका

होर्मुज से गुजरने वाले कुल तेल का 37.7% अकेले चीन जाता है. चीन अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का 80% इसी रास्ते से पूरा करता है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो चीन के कारखाने ठप पड़ सकते हैं और उसकी अर्थव्यवस्था को सबसे गहरी चोट लगेगी.

2. भारत में खाने की थाली भी महंगी

होर्मुज से गुजरने वाले तेल का 14.7% भारत आता है, लेकिन भारत की मजबूरी कहीं ज्यादा बड़ी है. भारत अपनी जरूरत का 85% क्रूड तेल और 50% LNG आयात करता है. इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IFPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज बंद होने पर भारत की GDP और डोमेस्टिक इनकम में गिरावट आना तय है. सबसे बड़ी मार किसानों और आम परिवारों पर पड़ेगी. भारत DAP उर्वरक का 60% आयात करता है और पूरी पोटाश की जरूरत भी आयात से पूरी होती है. होर्मुज बंद होने का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सब्जी, दाल और रोटी की कीमतें भी बढ़ा देगा.

3. जापान और साउथ कोरिया को औद्योगिक झटका

होर्मुज से गुजरने वाला 10.9% तेल जापान और 12% तेल साउथ कोरिया जाता है. दोनों देश अपनी ज्यादातर ऊर्जा आयात करते हैं और उनके उद्योग तेल पर चलते हैं. होर्मुज बंद होने का मतलब इनकी फैक्ट्रियों का धीमा पड़ जाना और महंगाई का बढ़ना होगा.

4. तेल निर्यातक देशों की भी मुश्किल

मजेदार बात यह है कि सिर्फ तेल खरीदने वाले ही नहीं, बल्कि तेल बेचने वाले भी इस बम की चपेट में आ जाएंगे. सऊदी अरब, UAE, कुवैत और इराक जैसे खाड़ी देश अपना तेल इसी रास्ते से बाहर भेजते हैं. मार्च 2026 में जब होर्मुज बंद हुआ, तो इराक और कुवैत को कुछ ही दिनों में अपना तेल उत्पादन कम करना पड़ा क्योंकि उनके पास तेल स्टोर करने की जगह ही खत्म हो गई थी. दूसरी ओर अमेरिका और रूस जैसे देशों को महंगे तेल से मुनाफा होता है.

कितनी बढ़ेंगी कीमतें और कितनी गिरेगी ग्रोथ?

JNU के रिटायर्ड प्रोफेसर और इकोनॉमिस्ट डॉ. अरुण कुमार ने तीन अलग-अलग नतीजे बताए हैं:

तेल की कीमतों का अनुमान:

युद्ध की स्थिति तेल की औसत कीमत (2026 में)
अगर युद्ध अप्रैल 2026 में खत्म हुआ 82 डॉलर प्रति बैरल
अगर युद्ध जुलाई 2026 तक चला 100 डॉलर प्रति बैरल
अगर युद्ध पूरे साल जारी रहा 125 डॉलर प्रति बैरल तक

द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, अगर होर्मुज साल की आखिरी तिमाही तक बंद रहता है तो 2026 में ग्लोबल GDP ग्रोथ 1.9% रह जाएगी, जो मंदी कहलाती है. वहीं 2027 में ग्लोबल GDP ग्रोथ 1.4% के करीब रह सकती है.

वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि होर्मुज बंद होने की वजह से वैश्विक महंगाई दर 2026 में 4% तक पहुंच सकती है, जो आम लोगों की क्रय शक्ति को बुरी तरह प्रभावित करेगी.

होर्मुज बंद होने के बाद अब क्या हालात हैं?

जुलाई 2026 की शुरुआत तक हालात यह थे कि होर्मुज से रोजाना करीब 2 टैंकर ही गुजर रहे थे, जबकि आम दिनों में 60 टैंकर गुजरते थे. ऐसे में अब:

  • राहत वाला रास्ता: अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई कूटनीतिक समझौता हो जाता है और होर्मुज खुल जाता है, तो तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी और दुनिया राहत की सांस लेगी.
  • ठहराव वाला रास्ता: होर्मुज बंद रहे, लेकिन युद्ध का दायरा न बढ़े. ऐसे में तेल की कीमत 80-90 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती है, जिससे महंगाई तो बढ़ेगी लेकिन पूरी दुनिया मंदी की चपेट में नहीं आएगी.
  • तबाही वाला रास्ता: होर्मुज बंद रहे और युद्ध और बड़े स्तर पर फैल जाए. इस स्थिति में तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाएगा और एशिया से लेकर यूरोप तक गंभीर आर्थिक संकट और मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा.

ईरान के हाथ कौन सा तुरुप का इक्का लगा है?

डॉ. ए. के. पाशा कहते हैं, ‘ईरान ने होर्मुज पर कंट्रोल करके वाकई एक ऐसा हथियार हासिल कर लिया है जिसके दम पर वह दुनिया की बड़ी-बड़ी ताकतों को अपनी बात मानने पर मजबूर कर सकता है. ईरान का इकोनॉमिक बम बिना किसी बड़े हमले के दुश्मनों को आर्थिक रूप से घुटनों पर लाने की ताकत रखता है. असली सवाल यह है कि अमेरिका और उसके सहयोगी इस अनोखी चुनौती का क्या जवाब देते हैं. भारत और जापान जैसे देश इस आग में से अपना रास्ता कैसे निकालते हैं.

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