क्या आपने भी देश में E20 पेट्रोल आने के बाद शोरूम से चमचमाती हुई नई कार खरीदी है? अगर हां, तो थोड़ा सावधान हो जाइए। आम तौर पर नई कार खरीदते समय लोग उसका मॉडल, वेरिएंट, रंग और रजिस्ट्रेशन की तारीख ही देखते हैं, लेकिन उसकी असली ‘मैन्युफैक्चरिंग डेट’ यानी बनने की तारीख को नजरअंदाज कर देते हैं। रायपुर उपभोक्ता अदालत के एक हालिया फैसले ने इस छिपी हुई तारीख को अचानक बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है।
अदालत ने एक ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि उसकी मारुति ग्रैंड विटारा कार E20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं थी, क्योंकि उसका निर्माण सरकार की समय-सीमा से पहले हुआ था, भले ही उसे एक साल बाद शोरूम से ‘बिल्कुल नई’ कार कहकर बेचा गया था। हालांकि मारुति इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे रही है। लेकिन इसने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, कि क्या देश में हजारों ग्राहकों ने अनजाने में ऐसी कारें तो नहीं खरीद लीं जो E20 ईंधन के लिए बनी ही नहीं थीं?