तमिलनाडु में चुनावी नतीजों के बाद जारी राजनीतिक हलचल के बीच डीएमके ने अपनी विधायक दल की बैठक में कई बड़े प्रस्ताव पारित किए। बैठक में पार्टी ने जनता और सहयोगी दलों का धन्यवाद किया, वहीं पार्टी अध्यक्ष एम के स्टालिन पर पूरा भरोसा जताते हुए उन्हें सभी जरूरी राजनीतिक फैसले लेने का अधिकार दे दिया। इसके साथ ही कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला गया। डीएमके ने साफ कहा कि तमिलनाडु एक और चुनाव के लिए तैयार नहीं है और राज्य को स्थिर सरकार की जरूरत है।
जनता-सहयोगियों को लेकर डीएमके ने क्या कहा?
डीएमके विधायक दल की बैठक में पहला प्रस्ताव तमिलनाडु की जनता और गठबंधन सहयोगियों के धन्यवाद के लिए पारित किया गया। पार्टी ने कहा कि जनता ने कठिन राजनीतिक हालात में भी डीएमके और उसके सहयोगियों पर भरोसा जताया। प्रस्ताव में कहा गया कि गठबंधन कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के समर्थन की वजह से पार्टी मजबूत स्थिति में पहुंची है। डीएमके ने इसे लोकतांत्रिक ताकतों की जीत बताया।
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स्टालिन को कौन से अधिकार दिए गए?
बैठक में तीसरा और सबसे अहम प्रस्ताव एम के स्टालिन को लेकर पारित हुआ। इसमें कहा गया कि मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक हालात को देखते हुए स्टालिन को तुरंत और जरूरी राजनीतिक फैसले लेने का पूरा अधिकार दिया जाता है। प्रस्ताव में कहा गया कि तमिलनाडु अभी दोबारा चुनाव नहीं चाहता और राज्य को स्थिर सरकार की जरूरत है। साथ ही यह भी कहा गया कि द्रविड़ आंदोलन की विचारधारा के खिलाफ काम करने वाली ताकतों को राज्य में जगह नहीं मिलनी चाहिए।
कांग्रेस पर डीएमके ने क्यों उठाए सवाल?
डीएमके ने चौथे प्रस्ताव में कांग्रेस पर खुलकर हमला बोला। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस ने धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील गठबंधन से दूरी बनाकर अपने पुराने राजनीतिक चरित्र को फिर दिखाया है। प्रस्ताव में कहा गया कि डीएमके गठबंधन की वजह से कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट और 28 विधानसभा सीटें मिली थीं। इसके बावजूद कांग्रेस ने कुछ ही दिनों में दूसरे मोर्चे की तरफ बढ़ने की कोशिश की। डीएमके ने इसे गठबंधन कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात बताया।
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