जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की चौथी कक्षा की छात्रा अमायरा ने पिछले साल 1 नंवबर को स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। ये मामला अब फिर से सुर्खियों में है। अमायरा के माता-पिता ने क्लासरूम का सीसीटीवी फुटेज सामने रखते हुए आरोप लगाया है कि अमायरा को उसके क्लासमेट बार-बार बुली करते थे, परेशान करते थे।
अमायरा ने कई बार टीचर्स से इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन न तो इस तरफ कोई खास ध्यान दिया गया न ही कोई कार्रवाई हुई। लिहाजा परेशान होकर बच्ची ने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। परिवार ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत सभी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
पिछले साल, घटना के अगले दिन दो सदस्यों वाली इंस्पेक्शन कमेटी के दौरे के बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने नीरजा मोदी स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इस मामले ने छात्रों में बुलिंग की घटनाओं पर फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है।
देश में छात्रों की बुलिंग (क्लासमेट द्वारा परेशान करने) के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। पर सवाल ये है कि-
- आखिर हमउम्र छात्र ऐसा करते क्यों हैं?
- इसके पीछे क्या सोच होती है?
- इसको लेकर मनोविज्ञान क्या कहता है और इस तरह की घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है?

