12वीं के परीक्षा परिणामों में इस बार डिजिटल पढ़ाई का असर साफ दिखाई दिया। कई छात्रों ने ऑनलाइन नोट्स, यूट्यूब लेक्चर और मोबाइल एप्स की मदद से बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, मोबाइल फोन पढ़ाई में सहायक होने के साथ-साथ ध्यान भटकाने और सोशल मीडिया की लत का कारण भी बन रहा है।

शिक्षा के बदलते दौर में मोबाइल अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि पढ़ाई का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। छात्रों का कहना है कि ऑनलाइन वीडियो और क्विक रिवीजन नोट्स से कठिन विषयों को समझना आसान हुआ और तैयारी में समय की बचत हुई। 12वीं के छात्र आयुष झा ने बताया कि ऑनलाइन वीडियो से मैथ्स और फिजिक्स समझने में मदद मिली, जिससे उन्हें 82 प्रतिशत अंक हासिल हुए। हालांकि, नोटिफिकेशन की वजह से कई बार ध्यान भटक जाता था।
सिविल लाइंस स्थित बंगाली सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र कार्तिक ने कहा कि मोबाइल के जरिये रिवीजन आसान हुआ और उन्हें 83 प्रतिशत अंक मिले, लेकिन सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण था। छात्र निशांत सिंह चौहान के अनुसार डिजिटल नोट्स से समय बचा, मगर लंबे स्क्रीन टाइम से थकान महसूस होती थी।
विशेषज्ञों का भी कहना है कि डिजिटल पढ़ाई तभी फायदेमंद है जब उसका संतुलित उपयोग किया जाए। नियमित समय प्रबंधन, आत्म-नियंत्रण और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर ही छात्र मोबाइल का सही लाभ उठा सकते हैं। मोबाइल न पूरी तरह दोस्त है, न दुश्मन, उसका सही उपयोग ही सफलता की कुंजी है।

