नीट पेपर लीक के विरोध में छात्र आंदोलन और 25 जुलाई के बिहार बंद के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में न्यायिक हिरासत में भेजे गए जन शक्ति जनता दल के प्रमुख और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की बेउर जेल में पहली रात मुश्किलों भरी रही। उन्होंने शुरुआत में भोजन करने से इनकार कर दिया। हालांकि, बाद में जेल अधिकारियों के समझाने पर उन्होंने भोजन कर लिया। इसी दौरान सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें जेल के अस्पताल वार्ड में भर्ती किया गया। वह आज भी डॉक्टर की निगरानी में हैं। जेल सूत्रों के अनुसार, तेज प्रताप अपने साथ भागवत गीता लेकर आए हैं। गीता का अध्ययन कर रहे हैं। आज सबकुछ सामान्य है। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।
इधर, जनशक्ति जनता दल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार जानबूझकर तेज प्रताप यादव के साथ अन्याय कर रही है। पहले उन्हें झूठे केस में फसाया फिर जेल भेज दिया उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है। तेज प्रताप यादव को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेजा है। अब आज को उनकी ओर से जमानत याचिका दायर कर दी गई है। जल्द ही उनके केस की सुनवाई होगी। हालांकि, उनके वकील जगन्नाथ सिंह ने कहा कि तेज प्रताप यादव को झूठे आरोपों में जेल भेजा गया है। इस बीच तेज प्रताप यादव के समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी को असंवैधानिक करार देते हुए सरकार से मुकदमा वापस लेने की मांग की है।
हिंसा के लिए उकसाने का आरोप
पटना पुलिस के अनुसार, 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान रामगुलाम चौक पर हुए प्रदर्शन में तेज प्रताप यादव ने प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाया था। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर उन्हें एसीजेएम के आवास स्थित अदालत में पेश किया गया, जहां से 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि तेज प्रताप यादव पर लोगों को हिंसा के लिए भड़काने का आरोप है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।
बिहार बंद के दौरान किया था प्रदर्शन
25 जुलाई को तेज प्रताप यादव तिरंगा लेकर अपने समर्थकों के साथ बिहार बंद को सफल बनाने के लिए निकले थे। वे नीट पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। गांधी मैदान स्थित गांधी प्रतिमा के पास उन्होंने धरना दिया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। उस समय तेज प्रताप यादव ने कहा था कि वह छात्रों के अधिकारों के लिए मर-मिटने को तैयार हैं। उनका आरोप था कि पुलिस उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है, जबकि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। हालांकि, कुछ घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया था।
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देर रात पुलिस ने अदालत में किया था पेश
प्रदर्शन के बाद गांधी मैदान इलाके में पथराव और बमबाजी की घटनाएं हुईं, जिसमें थाना अध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने वैज्ञानिक जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान शुरू की। पुलिस के अनुसार, टावर लोकेशन के जरिए पता चला कि तेज प्रताप यादव पटना के सिटी सेंटर मॉल में मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर उन्हें हिरासत में लिया और नौबतपुर थाने ले गई। मेडिकल जांच के बाद देर रात करीब 12:30 बजे उन्हें न्यायिक अधिकारी के आवास स्थित अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें बेउर जेल भेजने का आदेश दिया गया।
तेजस्वी यादव ने आज तक ही दिया है अल्टीमेटम
तेज प्रताप यादव के छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन के कई नेताओं और विधायकों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। उन्होंने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि मेरे बड़े भाई को भी गंभीर धाराओं में जेल भेजा गया, जो पूरी तरह गलत है। तेजस्वी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 27 जुलाई तक छात्रों और अन्य गिरफ्तार लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस लेकर उन्हें रिहा नहीं किया गया तो महागठबंधन पूरे बिहार में बड़ा आंदोलन करेगा।


