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Bengal Politics:’यही स्वभाव ममता की ताकत और कमजोरी भी’, मणिशंकर अय्यर ने बताया तृणमूल में टूट का बड़ा कारण – Mani Shankar Aiyar Says Mamata Temperament Her Strength Weakness Explain Reason Behind Split Tmc

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को लेकर बड़ा राजनीतिक संकट सामने आया है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के कई सांसदों और विधायकों के अलग होने की खबरों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने ममता बनर्जी के नेतृत्व और उनके व्यक्तित्व पर खुलकर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि ममता की मर्क्यूरियल पर्सनैलिटी यानी बेहद तेज, भावुक, अप्रत्याशित और अपने फैसलों पर अडिग रहने वाला स्वभाव ही उनकी सबसे बड़ी ताकत और कमजोरी दोनों है। अय्यर का कहना है कि ममता बनर्जी का यही स्वभाव, जिसने उन्हें राजनीति की ऊंचाइयों तक पहुंचाया, आज पार्टी के सामने खड़े संकट की एक बड़ी वजह भी बन गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है और उनके पास वापसी का अवसर मौजूद है।

तृणमूल कांग्रेस में कथित टूट को लेकर मणिशंकर अय्यर ने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में लगभग 20 लोकसभा सांसदों ने अलग संसदीय समूह बना लिया है और भाजपा नीत एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। इसके अलावा तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया है और 80 में से 60 से अधिक विधायक भी अलग गुट में शामिल हो गए हैं। यह घटनाक्रम विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के कुछ ही सप्ताह बाद सामने आया है। अय्यर ने कहा कि घटनाएं जिस तेजी से हुई हैं, वह चौंकाने वाली हैं, लेकिन उन्हें इस स्थिति पर पूरी तरह आश्चर्य नहीं है।

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क्या ममता बनर्जी का व्यक्तित्व ही उनकी सबसे बड़ी ताकत?

मणिशंकर अय्यर ने कहा कि ममता बनर्जी भारतीय राजनीति की बेहद असाधारण नेता हैं। उनके अनुसार ममता का आत्मविश्वास और संघर्ष करने की क्षमता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल में वामपंथी शासन को खत्म कर सत्ता तक पहुंचने के लिए ममता बनर्जी ने 12 से 13 वर्षों तक लगातार संघर्ष किया था। अय्यर ने कहा कि हर दिन और हर स्तर पर लड़ने की उनकी क्षमता ने उन्हें एक बड़े जननेता के रूप में स्थापित किया। यही कारण है कि आज भी वह भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिनी जाती हैं।

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने दूरी क्यों बनाई?

अय्यर का मानना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर असुरक्षा की भावना बढ़ी है। उन्होंने कहा कि जो नेता आज ममता बनर्जी से दूरी बना रहे हैं, उनमें से अधिकांश का अपना मजबूत राजनीतिक आधार नहीं था। उनकी पहचान और राजनीतिक ताकत काफी हद तक ममता बनर्जी के नेतृत्व से जुड़ी हुई थी। अय्यर के अनुसार अब ये नेता अपने लिए नए राजनीतिक अवसर तलाश रहे हैं और इसी कारण बड़ी संख्या में पार्टी छोड़ने की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में ऐसे बदलाव होते रहते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नेताओं का अलग होना किसी भी दल के लिए चिंता का विषय होता है।

इंडिया गठबंधन के लिए अब भी जरूरी हैं ममता बनर्जी?

मणिशंकर अय्यर ने कहा कि मौजूदा संकट के बावजूद ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान कमजोर नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ममता का जुझारू स्वभाव और कभी हार न मानने वाला रवैया विपक्षी गठबंधन इंडिया के लिए महत्वपूर्ण है। अय्यर के अनुसार ममता बनर्जी ऐसी नेता हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष जारी रखती हैं। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत चुनौती पेश करनी है तो ऐसे नेतृत्व की जरूरत होगी जो लगातार लड़ने का साहस रखता हो।

ममता के भविष्य और इंडिया गठबंधन को लेकर क्या बोले अय्यर?

अय्यर ने कहा कि यदि ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन के नेतृत्व से जुड़ी रहती हैं तो उनका राजनीतिक भविष्य अभी भी उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर चुनौतियां हो सकती हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका और बढ़ सकती है। कांग्रेस नेता ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन में सक्रिय नहीं रहीं तो इंडिया गठबंधन के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति का जिक्र करते हुए कांग्रेस द्वारा चुनाव के बाद विजय की पार्टी को समर्थन देने के फैसले को बड़ी राजनीतिक भूल बताया और कहा कि इससे गठबंधन की एकता को नुकसान पहुंचा है।

 

 

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