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क्या आपकी भी कभी कोई सर्जरी हुई है? ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में लेटकर डॉक्टर से बात करते-करते आंखें धीरे-धीरे बंद होने लगती हैं और फिर जब होश आता है तब तक सर्जरी पूरी हो चुकी होती है। क्या आपने भी ऐसा महसूस किया है? इस जादू को मेडिकल की भाषा में एनस्थीसिया कहा जाता है।
एनस्थीसिया को मेडिकल साइंस का वरदान माना जाता है। दुनिया में हर साल करोड़ों सर्जरी केवल इसलिए सुरक्षित तरीके से हो पाती हैं क्योंकि एनस्थीसिया के जरिए मरीज को नियंत्रित तरीके से दर्द से मुक्त और बेहोशी की अवस्था में रखा जा सकता है। अगर एनस्थीसिया की खोज न हुई होती, तो हार्ट-ब्रेन सर्जरी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, सी-सेक्शन और यहां तक कि कई सामान्य ऑपरेशन भी बेहद पीड़ादायक और लगभग असंभव हो जाता।
पर क्या आप जानते हैं कि एनस्थीसिया के इंजेक्शन में आखिर ऐसा क्या होता है जो कुछ सेकंड में ही पूरे शरीर या किसी खास हिस्से को सुन्न कर देता है? दिल धड़कता है, सांस चलती रहती है पर ऑपरेशन का दर्द महसूस नहीं होता? अगर आपके मन में भी ये सवाल हैं तो आइए इसे विस्तार से समझ लेते हैं।

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एनस्थीसिया में क्या होता है?
– फोटो : Freepik.com
पहले जान लीजिए एनस्थीसिया होता क्या है?
एनस्थीसिया ऐसी चिकित्सीय प्रक्रिया है जिसमें विशेष दवाओं की मदद से मरीज को दर्द महसूस नहीं होने दिया जाता, ताकि सर्जरी या अन्य मेडिकल प्रक्रिया सुरक्षित और बिना पीड़ा के पूरी की जा सके। इसमें केवल मरीज को बेहोश नहीं किया जाता, बल्कि मरीज की चेतना, दर्द की अनुभूति, मांसपेशियों की गतिविधि और कई बार याददाश्त को भी अस्थायी रूप से नियंत्रित किया जाता है।
एनेस्थीसिया में ऐसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है जिनसे कुछ समय के लिए शरीर में संवेदना खत्म हो जाती है। असल में यह नसों से दिमाग तक जाने वाले सेंसरी सिग्नल को रोककर काम करता है।
एनस्थीसिया चार तरह का होता है
- जनरल एनस्थीसिया, जिसमें मरीज पूरी तरह बेहोश रहता है
- रीजनल एनस्थीसिया, जिसमें शरीर के किसी बड़े हिस्से जैसे कमर से नीचे का भाग सुन्न किया जाता है
- लोकल एनस्थीसिया, जिसमें केवल एक छोटा हिस्सा सुन्न किया जाता है
- सेडेशन, जिसमें मरीज पूरी तरह बेहोश नहीं होता लेकिन आरामदायक और उनींदी अवस्था में रहता है।

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एनस्थीसिया में क्या होता है?
– फोटो : Freepik.com
एनस्थीसिया काम कैसे करता है?
एनस्थीसिया काम कैसे करता है इसे समझने के लिए पहले ये जानना जरूरी है कि हमें दर्द या चोट महसूस कैसे होती है?
हमारा शरीर दर्द महसूस करता है क्योंकि नसे किसी चोट या कटने की सूचना विद्युत संकेतों के रूप में दिमाग तक पहुंचाती हैं। दिमाग इन संकेतों को दर्द के रूप में समझता है। एनस्थीसिया इन्हीं संकेतों को रोक देती है।
- लोकल और रीजनल एनस्थीसिया में दवाएं नसों के भीतर मौजूद सोडियम चैनल को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर देती हैं। इससे विद्युत संकेत आगे नहीं बढ़ पाते और दिमाग तक दर्द की सूचना पहुंच ही नहीं पाती।
- वहीं जनरल एनस्थीसिया सीधे दिमाग और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर करता है। यह दिमाग की कोशिकाओं के बीच संचार करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर, विशेष रूप से गाबी (GABA) की गतिविधि बढ़ाता है और उत्तेजना पैदा करने वाले संकेतों को कम करता है। इससे आपके दिमाग की तरंगों के पैटर्न बदल जाते हैं, जिससे दिमाग के अलग-अलग हिस्सों का आपस में संपर्क रुक जाता है। ये रिवर्सिबल कोमा जैसी स्थिति होती है।

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एनस्थीसिया की प्रक्रिया
– फोटो : Freepik.com
कैसे शरीर हो जाता है सुन्न ?
एनस्थीसिया की दवाएं इस तरह से तैयार की जाती हैं कि वे बहुत तेजी से रक्त के माध्यम से दिमाग या नसों तक पहुंच सकें। जब दवा नस में दी जाती है, तो वह कुछ ही सेकंड में रक्त प्रवाह के जरिए दिमाग तक पहुंच जाती है। जिससे वह संकेत रुक जाते हैं जो हमें दर्द का एहसास दिलाते हैं।
एक तय समय के बाद जब दवा का असर धीरे-धीरे कम होने लगता है तो मरीज को होश आ जाती है और सर्जरी का दर्द भी महसूस हो सकता है।
एनेस्थीसिया के साइड-इफेक्ट्स भी जानिए
एनेस्थीसिया की सबसे डरावनी जटिलताओं में से एक है ‘एनेस्थीसिया अवेयरनेस’, यानी सर्जरी के दौरान होश में आ जाना। वैसे तो ये बहुत दुर्लभ है पर कुछ स्थितियों में ऐसा हो सकता है।
इस तरह के खतरे से बचने के लिए ऑपरेटिंग रूम में ऐसी खास मशीनें होती हैं जो ब्रेन वेव्स (दिमाग की तरंगों) पर नजर रखती हैं और अगर आप जागने लगते हैं तो एनेस्थीसिया टीम को अलर्ट कर देती हैं। आपकी टीम एनेस्थीसिया की डोज को एडजस्ट कर सकती है ताकि आपको होश न आए।
एनेस्थीसिया वैसे तो काफी सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। एनेस्थीसिया के बाद कुछ तरह की समस्याएं जैसे गले में खराश, जी मिचलाना और उल्टी, कंफ्यूजन,मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगने या कंपकंपी, सिरदर्द जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।
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स्रोत:
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।


