Donald Trump Hormuz Blockade: पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर पर बातचीत विफल होने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस कदर भड़क गए है कि उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी का आदेश दे दिया है. अगर वाकई में अमेरिकी सेना को होर्मुज की पहरेदारी पर लगा दिया जाता है, तो इससे मिडिल ईस्ट में जंग की ज्वाला और धधकने की पूरी संभावना है.
अमेरिका का अभी पूरा फोकस होर्मुज के रास्ते को खोलने पर है. इसी के मद्देनजर अमेरिका के दो युद्धपोत होर्मुज में गश्त लगाने के लिए तैनात भी कर दिए गए हैं. 28 फरवरी को ईरान में जंग का ऐलान होने के बाद से यह पहली दफा है, जब अमेरिकी सेना ईरान के इतने करीब और उसके रणनीतिक जलमार्ग में एक्टिव होते नजर आ रहे हैं. ट्रंप को अपने उपराष्ट्रपति JD वेंस का अपनी टीम के साथ खाली हाथ लौटना रास नहीं आ रहा है.
ट्रंप का ईरान पर आरोप
ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से 20 लाख डॉलर प्रति बैरल तक का अवैध टोल जबरन वसूलने का आरोप लगाया है. ट्रंप का यह भी कहा है कि ईरान इस अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग पर अपना नियंत्रण रखना चाहता है. ट्रंप इसके खिलाफ है. अमेरिका चाहता है कि ईरान सशर्त और सुरक्षित तरीके से होर्मुज खोल दे.

अमेरिकी नौसेना के एडमिरल ब्रैड कूपर के मुताबिक, एक नया सुरक्षित समुद्री रास्ता बनाया जा रहा है, जिसे जल्द ही जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा. इस रास्ते से होकर दुनियाभर में तेल-गैस की सप्लाई बिना रूकावट के जारी रहेगी.
बैठक में अमेरिका की क्या थी शर्त?
इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच चली मैराथन वार्ता में अमेरिका ने ईरान के सामने परमाणु हथियार बनाने की अपनी क्षमता को त्याग देने और यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह से बंद करने की शर्त रखी थी. हालांकि, ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानते हुए इंकार कर दिया. इससे अब मामला और बिगड़ने के आसार हैं.
तनाव बढ़ने की सुगबुगाहट तेज
2019 से अमेरिका ने भारत पर ईरानी कच्चे तेल की खरीद पर रोक लगा रखा है. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान ही भारत को सात साल में अपना पहला ईरानी कच्चे तेल का कार्गो मिला.
इसके बावजूद, भारत अभी भी इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे अन्य खाड़ी देशों से आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है और ये खेप उसी रास्ते से आती हैं. हाल के तनाव के दौरान ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज से होकर गुजरने की इजाजत दे रखी है. हालांकि, इस पर कड़ा नियंत्रण रखा गया है और इनकी पहुंच सीमित कर दी गई है.
अब सवाल यह आता है कि अगर अमेरिकी नौसेना नौसैनिक नाकेबंदी को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो ‘गैर-दुश्मन’ जहाजों को अनुमति देने का ईरान का मौजूदा रवैया जारी रहेगा या नहीं. वैसे भी ट्रंप के नाकेबंदी के ऐलान भर से क्रूड ऑयल की कीमतें आज 100 डॉल प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जो इस बात की चिंता को दर्शाती है कि इस क्षेत्र में आपूर्ति में रुकावट आ सकती है. यह रास्ता ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा है.
भारत पर असर
भारत तेल और गैस की अपनी जरूरतें ज्यादातर खाड़ी देशों से आयात के जरिए पूरा करता है. अमेरिकी सेना की नाकेबंदी से LNG और LPG की सप्लाई फिर से रूक सकती है. इससे देश में ईंधन की कीमतें बढ़ेगी और महंगाई पर बुरा असर पड़ेगा. उधर, ईरान ने भी चेतावनी दे रखी है कि अगर अमेरिकी युद्धपोत नाकेबंदी करते हैं, तो वह भी हमला करने से पीछे नहीं हटेंगे. इससे परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ सकता है.
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