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‘एक डॉलर में से 70 सेंट नहीं भेजेगी कनाडाई सेना, US पर…’, PM मार्क कार्नी ने किया बड़ा ऐलान

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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शनिवार (11 अप्रैल, 2026) को कनाडाई रक्षा क्षेत्र में होने वाले खर्च की पुरानी व्यवस्था को खत्म करने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि कनाडा रक्षा खर्च के लिए अपने प्रत्येक डॉलर के 70 सेंट अमेरिका को भेजने वाली पुरानी व्यवस्था को खत्म करेगा. उन्होंने देश के सैन्य उद्योग को फिर से मजबूत करने और वाशिंगटन पर निर्भरता कम करने की योजना भी पेश की. 

लिबरल पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में बोले पीएम कार्नी

मॉन्ट्रियल में लिबरल पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा को अपने रक्षा ढांचे और अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा. उन्होंने कहा, ‘अब वह समय खत्म हो गया है जब कनाडा की सेना अपने हर डॉलर में से 70 सेंट अमेरिका को भेजती थी.’ पीएम कार्नी के इस बयान के बाद सम्मेलन में मौजूद लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं.

पीएम मार्क कार्नी का यह बयान उनके उस संदेश का नतीजा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अमेरिका के रक्षा आपूर्तिकर्ताओं पर कनाडा की निर्भरता अब टिकाऊ नहीं रही. इसलिए उनकी सरकार का फोकस रक्षा सामग्रियों के घरेलू उत्पादन और कनाडाई सप्लायर्स को प्राथमिकता देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार का निर्माण करना है.

कार्नी के इस कदम के पीछे की क्या है वजह?

पीएम मार्क कार्नी ने बार-बार इस मुद्दे को एक संरचनात्मक समस्या के रूप में प्रस्तुत किया है. कनाडाई PMO के मुताबिक, अक्टूबर 2025 के प्री-बजट संबोधन में उन्होंने कहा था, ‘कनाडाई सेना के लिए खर्च होने वाले प्रत्येक डॉलर में से 70 सेंट से ज्यादा अमेरिका को जाता है.’ वहीं, अप्रैल 2026 में उन्होंने इस बात को दोहराते हुए कहा, ‘अब ऐसा नहीं होगा कि कनाडा के सैन्य खर्च का 70 सेंट से अधिक हिस्सा अमेरिका को जाए.’

यह सामान्य राजनीति का समय नहीं- कार्नी

देश के रक्षा क्षेत्र को लेकर की गई यह टिप्पणी एक व्यापाक भाषण का हिस्सा थी, जिसमें पीएम मार्क कार्नी ने कनाडा के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण की बात की. उन्होंने देश से राजनीतिक एकता की अपील की, क्योंकि देश तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेज प्रगति जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘यह सामान्य राजनीति का समय नहीं है, बल्कि एकजुट होकर हम एक मजबूत कनाडा बनाएंगे, जिसे कोई भी हमसे छीन नहीं सकता.’ उन्होंने तर्क दिया कि ये बदलाव जोखिम के साथ-साथ अवसर भी लाते हैं, बशर्ते कनाडा निर्णायक कदम उठाए.

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