पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली सीपीजे
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स यानी सीपीजे भी संभावित नामांकन में शामिल है। अमेरिका स्थित यह संगठन संघर्ष और संकट वाले इलाकों में पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर नजर रखता है। यह पत्रकारों की मौत और उन पर होने वाले हमलों का रिकॉर्ड तैयार करता है। साथ ही उनकी सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए आवाज उठाता है।
पीआरआईओ के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर में 132 पत्रकार और मीडिया कर्मी मारे गए। गाजा में युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकारों की जान गई। यह पत्रकारों के लिए बेहद खतरनाक संघर्ष क्षेत्रों में शामिल रहा। वहीं रूस, मैक्सिको, म्यांमार और अफगानिस्तान में भी पत्रकारों को हिंसा, संगठित अपराध और दमन का सामना करना पड़ा।
इस बार महिलाओं के नामों पर भी नजर
नोबेल शांति पुरस्कार के 125 साल के इतिहास में 112 व्यक्तिगत विजेताओं में सिर्फ 20 महिलाएं रही हैं। पिछले 15 वर्षों में व्यक्तिगत विजेताओं में आठ महिलाएं और छह पुरुष रहे हैं। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता जोडी विलियम्स ने इस साल भी महिलाओं को सम्मान मिलने की उम्मीद जताई है।
संभावित नामों में गाजा में काम करने वाली सर्जन सारा अल-सक्का और रूसी विपक्षी नेता अलेक्सी नवलनी की पत्नी यूलिया नवलनाया के नाम भी सामने आए हैं।
दुनिया में बढ़ते संघर्षों के बीच हो रहा फैसला
2026 का नोबेल शांति पुरस्कार ऐसे समय में दिया जाएगा, जब सूडान, यूक्रेन, यमन, ईरान और मध्य पूर्व के कई हिस्सों में गंभीर संघर्ष जारी हैं। उप्साला कॉन्फ्लिक्ट डेटा प्रोग्राम के शॉन डेविस ने बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की ओर इशारा किया है। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय नियमों को लागू कराने में अमेरिका की घटती इच्छा ने भी वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित किया है।
कब से शुरू होगी नोबेल पुरस्कार की घोषणा?
नोबेल पुरस्कारों की घोषणा 5 अक्तूबर से शुरू होगी। 5 अक्तूबर को चिकित्सा, 6 अक्तूबर को भौतिकी, 7 अक्तूबर को रसायन विज्ञान, 8 अक्तूबर को साहित्य, 9 अक्तूबर को शांति और 12 अक्तूबर को अर्थशास्त्र के पुरस्कार की घोषणा की जाएगी। इस साल नोबेल पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर यानी करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर है। यह राशि किसी व्यक्ति, छोटे समूह या संगठन को दी जा सकती है।

