देश में कैंसर के महंगे इलाज और जीवनरक्षक दवाओं की भारी कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और संसद की स्थायी समिति के मंथन के बाद केंद्र सरकार ने इस दिशा में निर्णायक कदम उठाने की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार अब कैंसर की प्राथमिक जांच, आधुनिक तकनीक और दवाओं के सटीक इस्तेमाल के लिए एक व्यापक व मानक रोडमैप तैयार कर रही है।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि किस कैंसर में कौन-सी जांच, थेरेपी और दवा सबसे प्रभावी व जरूरी है, ताकि मरीजों को गैर-जरूरी महंगे जांच से बचाया जा सके। स्वास्थ्य मंत्रालय प्रस्तावित रोडमैप के तहत कैंसर के हर चरण के लिए मानक उपचार प्रोटोकॉल को नए सिरे से अपडेट कर रहा है। देखा गया है कि सटीक दिशानिर्देश के अभाव में मरीजों को ऐसी महंगी दवाएं या जांच लिख दी जाती हैं, जिनका प्रभाव सीमित होता है।
नई व्यवस्था में तथ्य आधारित इलाज को अनिवार्य बनाकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज की प्रक्रिया पारदर्शी, तर्कसंगत और मरीज की जेब के अनुकूल हो। कुल मिलाकर दवा, तकनीक या मशीनों को तैयार करने में होने वाले खर्च और आम लोगों तक उसके पहुंचने की कीमत की समीक्षा होगी।
हर जिले में विशेष जांच केंद्र
सरकार की योजना में कैंसर की जांच को गांवों तक ले जाने पर जोर है। इसके तहत जिला स्तर पर प्राथमिक स्क्रीनिंग तकनीकों का विस्तार किया जाएगा, जिससे शुरुआती चरण में ही बीमारी की पहचान कर इलाज के कुल खर्च को कम किया जा सके। इसके लिए हर जिले के सरकारी अस्पताल में कैंसर की जांच के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए जाएंगे। स्तन, मुंह और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जांच के लिए एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। जांच रिपोर्ट तैयार करने में एआई आधारित टेली-पैथोलॉजी और डिजिटल पैथोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाने की भी योजना है।
जांच व इलाज की लागत का आकलन
हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट इन इंडिया (एचटीएआईएन) के जरिये अलग-अलग जांच और इलाज की लागत-प्रभाविता का आकलन किया जाएगा। हाल ही में स्वास्थ्य संबंधी संसद की स्थायी समिति के सामने भी इस पर चर्चा हुई थी। कैंसर की दवाओं का भी इसी आधार पर आकलन होगा। देखा जाएगा कि कौन-सी दवा किस तरह के कैंसर में ज्यादा उपयोगी है।