हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में करीब सौ साल पहले महात्मा गांधी ने पानी की किल्लत, संकरी सड़कों और भीड़-भाड़ जैसी जिन समस्याओं को उजागर किया था वे आज भी बरकरार हैं। अंग्रेजों ने जो रेलवे ट्रैक शिमला पहुंचाया था, वो एक सदी बाद भी एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सका है। आज भी शहर के लोग पीने के पानी की किल्लत से परेशान हैं। सड़क की समस्या का भी समाधान नहीं हुआ, बल्कि ट्रैफिक जाम के रूप में यह और विकराल हो चुकी है। वर्ष 1921 में मोहन दास कर्मचंद गांधी(महात्मा गांधी) एक सप्ताह(12 से 18 मई) के शिमला प्रवास पर आए थे। दसी दाैरान गांधी ने संस्मरण लिखा, जिसमें उन्होंने 7,500 फीट की ऊंचाई पर बसे शिमला को 500वीं मंजिल कहा था। 22 मई 1921 को नवजीवन के गुजराती अंक में छपे इस संस्मरण में उन्होंने शासन को जनता की पहुंच से दूर बताते हुए इस समस्याओं का समाधान करने के लिए कहा था।
